

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : क्या ग्रीष्मावकाश (ग्रीष्मकालीन अवकाश) कॉलेजों में कक्षाओं का समय बढ़ाने का स्थायी समाधान होगा? कलकत्ता विश्वविद्यालय ने फिलहाल ऐसा ही निर्णय लेने पर विचार करना शुरू कर दिया है। कोरोना के बाद ओबीसी समस्या के कारण, पिछले पांच वर्षों से स्नातक की कक्षाएं निर्धारित तिथि 2 जुलाई को शुरू नहीं हो रही थीं। परिणामस्वरूप, पहले सेमेस्टर की पढ़ाई जुलाई में शुरू होकर अगस्त तक चलती थी।
इस वर्ष भी यही समस्या उत्पन्न हुई। हालांकि, उच्च शिक्षा में ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रहे मुकदमे के सुलझने के बाद शुक्रवार से राज्य भर में स्नातक कक्षाएं शुरू हो गईं। ऐसे में, विश्वविद्यालय प्रशासन डेढ़ महीने की ग्रीष्मकालीन छुट्टियों (16 मई से 30 जून) में बदलाव करके कक्षाओं की संख्या बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए 22 जुलाई को विभिन्न विभागों के डीन, सिंडिकेट सदस्यों और परीक्षा नियंत्रक के साथ एक समिति का गठन किया गया था।
उस समिति के सदस्य यह भी जांच करेंगे कि 47 साल पुराने नियमों को बदलने के लिए कानून में क्या बदलाव जरूरी हैं। सिंडिकेट के कई सदस्यों ने बताया कि समिति सेमेस्टर प्रणाली के तहत कॉलेजों में कक्षाओं के दिन और घंटे बढ़ाने के तरीकों पर विचार करेगी और एक पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। समिति का गठन विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक जयंत सिन्हा ने किया है। विश्वविद्यालय के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार को सेंट्रलाइज्ड पोर्टल के माध्यम से पहले राउंड में दाखिला लेने वाले छात्रों को स्नातक कक्षाएं शुरू करने का अवसर मिलेगा।
हालांकि, उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुसार, दूसरे राउंड में दाखिला लेने वाले छात्र पूजा से पहले कोई भी कक्षा नहीं ले पाएंगे क्योंकि आवेदन के बाद उनकी एडमिशन मेरिट लिस्ट 16 सितंबर को जारी होगी। कॉलेज जाकर एडमिशन, अपग्रेडेशन और दस्तावेजों का सत्यापन पूरा करने में कम से कम दस दिन और लगेंगे। यह सब करते-करते पूजा आ जाएगी। पूजा की छुट्टियां एक महीने और चलेंगी। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए समिति कक्षाएं और घंटे बढ़ाने की सिफारिश करेगी।