सीयू में पेंशन-ग्रेच्युटी को लेकर असमंजस, शिक्षक संघ ने जताई आपत्ति

सीयू में पेंशन-ग्रेच्युटी को लेकर असमंजस, शिक्षक संघ ने जताई आपत्ति
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कोलकाता : कलकत्ता विश्वविद्यालय (सीयू) में पेंशन और ग्रेच्युटी को लेकर एक बार फिर असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी हालिया अधिसूचना के बाद से सेवानिवृत्त कर्मचारियों और शिक्षकों में भ्रम और चिंता का माहौल है। रजिस्ट्रार देबाशीष दास की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, 1 अक्टूबर के बाद सेवानिवृत्त होने वाले और जनरल प्रोविडेंट फंड (जीपीएफ) स्कीम से जुड़े कर्मचारियों को रिटायरमेंट बेनिफिट्स आंशिक और अस्थायी (प्रोविजनल/टेम्पररी) आधार पर दिए जाएंगे।

अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन की पूरी (100 प्रतिशत) राशि तो मिलेगी, लेकिन इसे अंतिम पेंशन नहीं माना जाएगा। वहीं ग्रेच्युटी की कुल राशि का केवल 75 प्रतिशत ही फिलहाल जारी किया जाएगा। शेष राशि बाद में निर्णय के अनुसार दी जाएगी। इस निर्णय से कई सेवानिवृत्त कर्मचारियों में असंतोष देखा जा रहा है।

हालांकि, इस मुद्दे पर कुलपति (वीसी) आशुतोष घोष ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में पूरी ग्रेच्युटी देने का निर्णय लिया गया है, लेकिन पेंशन और ग्रेच्युटी दोनों को ही प्राविजनल माना जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अंतिम निर्णय राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही लिया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय राज्य के हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट द्वारा वर्ष 2000 और 2025 में जारी विभिन्न सरकारी आदेशों और उनसे संबंधित अधिसूचनाओं के आधार पर लिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि वे सरकारी नियमों का पालन करने के लिए बाध्य हैं। इस बीच, कोलकाता विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (कूटा) ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। कूटा का आरोप है कि इस तरह के निर्देश विश्वविद्यालय की स्वायत्तता में सीधा हस्तक्षेप हैं और इससे शिक्षकों व कर्मचारियों के अधिकारों का हनन हो रहा है। संघ ने इस मुद्दे पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

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