

कोलकाता : राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के लागू होने के बाद अब स्नातक या ग्रेजुएशन का कोर्स तीन साल की बजाय चार साल का हो गया है। इस बदलाव के कारण कई कॉलेजों को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। चौथे वर्ष के लिए अतिरिक्त संसाधन, कक्षाएं और पर्याप्त स्टाफ नहीं होने के कारण अधिकांश कॉलेज इस नए ढांचे में पूरी तरह सक्षम नहीं हैं। इसी स्थिति को देखते हुए कोलकाता विश्वविद्यालय ने एक अहम पहल की है। विश्वविद्यालय के वीसी आशुतोष घोष ने बताया कि अब छात्र चाहें तो चौथे वर्ष की पढ़ाई सीधे विश्वविद्यालय में कर सकते हैं। यह व्यवस्था उन छात्रों के लिए है, जिन्होंने तीसरे वर्ष में निर्धारित न्यूनतम अंक प्राप्त किए हैं। चौथे वर्ष में पढ़ाई पूरी करने वाले छात्र “ऑनर्स विद रिसर्च” डिग्री प्राप्त करेंगे। वहीं, जिन छात्रों ने केवल तीन साल में ऑनर्स कोर्स पूरा किया है, वे सामान्य ऑनर्स ग्रेजुएट के रूप में स्नातक होंगे।
चौथे वर्ष का पाठ्यक्रम विशेष रूप से शोध के लिए तैयार किया गया है, ताकि छात्र अपनी रिसर्च स्किल्स विकसित कर सकें। इस वर्ष को पूरा करने के बाद छात्र सीधे पीएचडी के लिए पात्र होंगे। जबकि तीन साल के ऑनर्स पूरा करने वाले छात्रों के लिए पारंपरिक दो वर्षीय मास्टर्स कोर्स भी उपलब्ध रहेगा। वीसी आशुतोष घोष के अनुसार, “जब छात्र तीसरे वर्ष को पूरा करेंगे, तब विश्वविद्यालय एक प्रवेश परीक्षा आयोजित करेगा। इसके आधार पर छात्रों का चयन चौथे वर्ष के पाठ्यक्रम में होगा। चयनित छात्रों को संबंधित कॉलेज छोड़कर एक वर्ष के लिए विश्वविद्यालय में पढ़ना होगा। इसके साथ ही विश्वविद्यालय में पारंपरिक दो वर्षीय मास्टर्स कोर्स भी जारी रहेगा।” कोलकाता और आसपास के कई कॉलेजों में पर्याप्त कक्षाओं, प्रयोगशालाओं और शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों और कॉलेजों दोनों के लिए यह निर्णय राहत भरा साबित होगा।