किसी ने सराहा तो किसी ने नकारा, आम जनता की मिलीजुली प्रतिक्रिया

हर जिले में छात्रावास बनाने की पहल की हुई सराहना शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि को लेकर कुछ वर्ग संतुष्ट
किसी ने सराहा तो किसी ने नकारा, आम जनता की मिलीजुली प्रतिक्रिया
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प्रगति, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : 2026 का बजट पेश होने के बाद आम जनता की मिलीजुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। किसी की आवाज में राहत, तो किसी की आवाज में निराशा देखने को मिली। कई लोगों का कहना है कि इस बार के बजट ने आज जनता की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, तो कुछ लोगों ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा, रेल व कृषि क्षेत्र में बड़ी पहल की गयी है। रविवार को बजट पेश होने के बाद सन्मार्ग ने आम लोगों से बात की और उनकी राय जानने की कोशिश की। ऐसे में तिवारी ब्रदर्स मिष्ठान्न प्रतिष्ठान के प्रमुख लक्ष्मीकांत तिवारी की दृष्टि में यह एक संतुलित बजट है। शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा, रेल व कृषि क्षेत्र में बड़ी पहल की गयी है। एच एम दीवान ग्रुप के चैयरमैन मुरारीलाल दीवान की दृष्टि में इस बजट में मेक इन इंडिया और बायो फार्मा, सेमीकंडक्टर पर विशेष जोर दिया गया है। छात्राओं के लिए प्रत्येक जिला में एक छात्रावास खोलना और दिव्यांगों के लिए नये सेंटर खोलना बड़ी बात है। विनोद पाजिटिव फाउंडेशन और शिक्षायतन फाउंडेशन के महासचिव विनोद अग्रवाल ने कहा कि बजट आशावादी फलक की जगह निराशा की घटा फैला गया। बढ़ती महंगाई से त्रस्त आम आदमी की अपेक्षाओं को नहीं समझा गया। बजट में कुछ भी ऐसी स्पष्ट घोषणा नहीं है, जिससे साधारण इंसान को राहत मिलेगी। राम मंदिर के पास दुकान चलाती एक महिला कुसुम ने कहा कि आम जनता की रोजमर्रा की जरूरत की चीजें, जिसका दाम कम होना जाहिए था उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ। गीता ने कहा कि बजट में सोना-चांदी, जिसका दाम आसमान छू रहा है और यह आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गये हैं, उम्मीद थी कि इसके दाम घटेंगे, लेकिन इसका जिक्र तक नहीं किया गया। मीरा ने कहा कि तेल व अन्य खाद्य पदार्थ के दाम कम होने चाहिए थे, सिर्फ कपड़े या इलेक्ट्रॉनिक्स के दाम घटने से कोई फायदा नहीं होगा। आशांक प्रतीक ने कहा कि इस साल के बजट में ज्यादा कुछ खास देखने को नहीं मिला। इनकम टैक्स में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। हर जिले में छात्रावास होने की बात कही गई है, जाे छात्राओं के लिए की गयी एक बड़ी पहल है।

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