ASISC की पहल पर हिंदी शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला

कक्षा 6 से 12 तक के हिंदी शिक्षकों ने लिया भाग बदलते समय में हिंदी भाषा और साहित्य शिक्षा के महत्व पर जोर
ASISC की पहल पर हिंदी शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला
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प्रगति, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता: हाल ही में एसोसिएशन ऑफ स्कूल्स फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट (ASISC) की पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्व चैप्टर द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यशाला में आज के बदलते दौर में हिंदी भाषा और साहित्य शिक्षा के महत्व पर विशेष बल दिया गया। यह कार्यशाला श्री राम नारायण सिंह मेमोरियल हाई स्कूल, राजडांगा में संपन्न हुई। इसमें कक्षा 6 से 12 तक के हिंदी शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराना और उन्हें बदलते प्रश्नपत्र पैटर्न के अनुरूप अपने शिक्षण को और प्रभावी बनाना था। वक्ताओं ने कहा कि समय के साथ-साथ शिक्षा के तौर-तरीके भी बदल रहे हैं, ऐसे में शिक्षकों का प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तभी संभव है जब शिक्षक स्वयं निरंतर सीखने की प्रक्रिया में शामिल रहें। यह पहल छात्रों को जटिल और विश्लेषणात्मक प्रश्नों को बेहतर ढंग से समझने और उत्तर देने में मदद करेगी।

यह कार्यशाला एएसआईएससी की कंटीन्यूइंग प्रोफेशनल डेवलपमेंट (Continuing Professional Development) पहल के तहत आयोजित की गई थी। कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख अतिथियों में शामिल थे — उषा सिंह, सचिव, श्री राम नारायण सिंह मेमोरियल हाई स्कूल, राजडांगा; पूजा मेहरा, प्राचार्य, श्री राम नारायण सिंह मेमोरियल हाई स्कूल; शैलेश पांडे, सचिव, एएसआईएससी पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्व चैप्टर; सीमा सप्रू, ट्रेनिंग विभाग की संयोजिका और द हेरिटेज स्कूल की प्रिंसिपल; तथा अहाना भट्टाचार्य, एएसआईएससी वेस्ट बंगाल और नॉर्थ ईस्ट चैप्टर की कोऑर्डिनेटर।

कार्यशाला में 140 से अधिक हिंदी शिक्षकों ने भाग लिया। मुख्य वक्ताओं में डी. वी. सिंह, जिनके पास 28 वर्षों से अधिक का अनुभव है और जो ‘नवीन हिंदी व्याकरण तथा रचना’ श्रृंखला के लेखक हैं; रमायण दुबे, जिन्हें वर्ष 2012 में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा हिंदी शिक्षा में योगदान के लिए सम्मानित किया गया था; तथा सौमित्र कुमार जायसवाल, जो द हेरिटेज स्कूल में हिंदी शिक्षक हैं, शामिल थे। इस कार्यशाला ने हिंदी शिक्षण के क्षेत्र में एक नई ऊर्जा का संचार किया और शिक्षकों को अपने शिक्षण को और अधिक प्रभावी व रचनात्मक बनाने के लिए प्रेरित किया।

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