

प्रगति, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। ठीक इसी प्रकार AI, जिससे कई चीजें आसान हो गई हैं, तो इसके कई नुकसान भी हैं। शिक्षा जगत भी इससे अछूता नहीं है। एक समय था जब कक्षा में ब्लैकबोर्ड पर पढ़ाई हाेती थी, लेकिन आज उसकी जगह स्मार्ट बोर्ड, फ्लैट बोर्ड, टैबलेट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने ले ली है। आज का जनरेशन, जिन्हें हम Gen-Z कहते हैं, वे हर टेक्नोलॉजी इंटरनेट, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे टूल्स का काफी बेहतर ढंग से इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि, सवाल यह है कि क्या वे तकनीक का इस्तेमाल हमेशा सही दिशा में कर रहे हैं? तकनीक जहां ज्ञान बढ़ाने का माध्यम बन सकती है, वहीं इसका अत्यधिक और गलत उपयोग ध्यान भटकाने और समय की बर्बादी का कारण भी बन रहा है। देखा जा रहा है कि ज्यादातर बच्चे एडिक्ट होते जा रहे हैं और इस वजह से उनकी बाॅण्डिंग लोगों से दिन ब दिन कम होती जा रही है।
पैरेंट्स की 90% शिकायत होती है फाेन को लेकर
स्कूल मैनेजमेंट की ओर से बताया गया कि ज्यादातर पैरेंट्स अपने बच्चे के मोबाइल एडिक्शन को लेकर शिकायत करते हैं। पैरेंट्स का कहना है कि स्कूल से आने के बाद बच्चे पूरा समय फोन में लगे रहते हैं। उन्हें लगता है कि AI के पास उनके सभी सवालों का जवाब है। हालांकि कई बच्चे इसका इस्तेमाल करना जानते हैं और वे पढ़ाई और किसी विषय के बारे में विशद जानकारी के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं, मगर ऐसे बच्चे जिनका ध्यान काफी आसानी से भटक जाता है, वे इस चकाचौंध की दुनिया में खोते जा रहे हैं। बच्चे फोन के प्रति इतना ज्यादा एडिक्ट हो गए हैं कि उन्हें दिन दुनिया से कोई मतलब नहीं रहता है। इसी वजह से वे फैमिली बॉण्डिंग और बाहरी दुनिया को समझ नहीं पा रहे हैं।
क्या कहना है स्कूल मैनेजमेंट का? श्री शिक्षायतन स्कूल कि प्रिंसिपल संगीता टंडन ने कहा कि हर चीज के दो पहलू होते हैं, देखा जा रहा है कि AI के इस्तेमाल से जहां पढ़ाई व अन्य चीजें सहज हो गई हैं, वहीं इसका जरूरत से ज्यादा उपयाेग नुकसान का कारण बनता जा रहा है। कई पैरेंट्स बच्चे के फोन एडिक्शन को लेकर शिकायत करते हैं। देखा जा रहा है कि बच्चों में पहले जो माता-पिता या रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ बॉण्डिंग देखी जाती थी, वह कम होती जा रही है। श्री जैन विद्यालय के प्रिंसिपल संजय पांडे ने बताया कि पैरेंट्स को यह ध्यान रखना होगा कि उनके बच्चे फोन का सही उपयोग कर रहे हैं या नहीं। बदलती दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए बच्चों को टेक्नोलॉजी का उपयाेग करना चाहिए, मगर इसके नुकसानदायक पहलुओं को भी ध्यान में रखना चाहिए।