हिमाचल के राज्यपाल की छात्रों से अपील: हिमालय बचाएं, तकनीक अपनाएं

हिमाचल के राज्यपाल काविंदर गुप्ता ने विद्यार्थियों से हिमालयी पर्यावरण संरक्षण की अपील की
हिमाचल के राज्यपाल की छात्रों से अपील: हिमालय बचाएं, तकनीक अपनाएं
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हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल काविंदर गुप्ता ने शुक्रवार को विद्यार्थियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा कर हिमालयी पर्यावरण के जिम्मेदार संरक्षक बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को भारत की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक मूल्यों से जुड़े रहते हुए आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक को भी अपनाना चाहिए।

डलहौजी हिलटॉप स्कूल के वार्षिक समारोह ‘विरासत-2026’ को संबोधित करते हुए गुप्ता ने कहा कि विरासत केवल वह नहीं है, जो पिछली पीढ़ियों से हमें मिली है, बल्कि यह भी है कि वर्तमान पीढ़ी अपने विचारों, व्यवहार और कार्यों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के लिए क्या छोड़कर जाएगी।

राज्यपाल ने कहा कि युवा पीढ़ी को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के लिए भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक मूल्यों को संरक्षित करना जरूरी है। इसके साथ ही आधुनिक ज्ञान, विज्ञान और तकनीक को अपनाना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में तार्किक सोच, रचनात्मकता, व्यावहारिक ज्ञान, समस्याओं का समाधान करने की क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी होना चाहिए।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 का उल्लेख करते हुए गुप्ता ने कहा कि यह नीति नवाचार, कौशल विकास और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देकर शिक्षा व्यवस्था में बदलाव का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स, एसटीईएम शिक्षा और डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म विद्यार्थियों के लिए नए अवसर खोल रहे हैं। इनसे हिमाचल प्रदेश जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों को भी लाभ मिल सकता है।

हालांकि, राज्यपाल ने आगाह किया कि तकनीकी ज्ञान के साथ विवेक, नैतिकता और मानवीय मूल्यों का होना भी जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से टिकाऊ जीवनशैली अपनाने और भारतीय संस्कृति एवं मूल्यों से जुड़े रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि आधुनिक कौशल और ज्ञान हासिल कर विद्यार्थी विकसित भारत के लक्ष्य में सार्थक योगदान दे सकते हैं।

विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने और समर्पण के साथ उन्हें साकार करने का आह्वान करते हुए गुप्ता ने कहा कि सफलता का आकलन केवल अंकों या पदों से नहीं किया जाना चाहिए। किसी व्यक्ति की सफलता उसके चरित्र, आचरण और समाज के प्रति योगदान से भी तय होती है।

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