हाइपरटेंशन-इलाज और ध्यान जरूरी

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हाईपरटेंशन, यानी कि उच्च रक्तचाप की समस्या बहुत कामन हो गई है। अब तो यूथ

भी इसकी गिरफ्त में तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। हाई बी पी से दिल किडनी, दिमाग और

आंखें प्रभावित होती हैं। एक नई स्टडी के अनुसार बड़े शहरों में तीन में से एक इंसान

इससे प्रभावित है। औरतें भी अछूती नहीं हैं इस समस्या से।

हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार 30 से 32 वर्ष की एज ग्रुप के लोग अब इसकी चपेट

में आ रहे हैं। उनमें से अधिकतर युवाओं को इसकी भनक तक भी नहीं होती क्योंकि

कुछ समय पूर्व तक तो हाई बी पी की समस्या 50-60 वर्ष से ऊपर लोगों में होती थी।

पूछने पर इसका कारण तनाव और रहन सहन ही बताया गया।

हाई बी पी से हार्ट को एक्स्ट्रा वर्क करना पड़ता है। लगातार हाई बी पी से आर्टरीज़ भी

डैमेज हो सकती हैं। इन सबसे धीरे धीरे हार्ट मसल्स मोटी हो जाती हैं और उन्हें

ऑक्सीजन की सप्लाई अधिक चाहिए होती है।

हाई बी पी के कोई विशेष लक्षण नहीं होते। कई बार रोगी को सालों इसका आभास भी

नहीं होता। बस कभी कभी सिरदर्द, थकान, आलस, श्वास लेने में कठिनाई होती है जिसे

नजरअंदाज कर दिया जाता है। 30 वर्ष की आयु के बाद साल में एक बार ब्लड प्रेशर

चेक करवा लेना चाहिए। अगर घर में कोई हाई बी पी से ग्रस्त है तो साल में तीन

चार बार चैक करवा लेना चाहिए।

ब्रेन सेंटर एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार जो अक्सर स्ट्रेस में रहते हैं उन्हें हाई बी पी

की समस्या हो सकती है। अगर आप मोटापे या मधुमेह के रोगी हैं और नमक अधिक

खाते हैं, धूम्रपान और अल्कोहल का सेवन अधिक करते हैं या परिवार में कोई सदस्य

हाई बी पी ग्रस्त है तो आपको हाइपरटेंशन का खतरा अधिक हो सकता है। वैसे इसका

इलाज नियमित दवा का सेवन करना है पर उसके साथ-साथ लाइफ स्टाइल में बदलाव

भी जरूरी है।

अपने लाइफस्टाइल में लाएं सुधार

-अपने खान पान पर विशेष ध्यान दें। भोजन वही लें जो आपके हृदय को स्वस्थ रखे।

-प्रतिदिन कम से कम आधा घंटा व्यायाम करें। चाहें तो एरोबिक व्यायाम कर सकते हैं

या थोड़ा तेज भी चल सकते हैं।

-स्मोकिंग को तुरंत बॉय बॉय कर दें।

-अल्कोहल का सेवन बहुत सीमित कर दें। अधिक से अधिक दो पैग से ज्यादा न लें।

-नमक का सेवन सीमित मात्रा में ही करें।

-तनाव से बचें। तनाव को मैनेज करने के तरीके सीखें। योग और मेडिटेशन भी तनाव

को कम करते हैं।

-पानी खूब पीएं।

-रेशेदार खाद्य पदार्थों का सेवन करें और लो फैट डाइट लें।

-अपने वजन पर नियंत्रण रखें।

-दिन में फ्रूट का सेवन अवश्य करें अगर आप हैल्दी हैं तो फ्रूट जूस न लें।

-डॉक्टर द्वारा बताई दवाई का नियमित सेवन करें। नीतू गुप्ता(स्वास्थ्य दर्पण)

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