

आमतौर पर हर आयु के लोगों से सिरदर्द की शिकायत अक्सर सुनने को मिलती है। बड़े-बूढ़े, जवान, बच्चे सभी इस से परेशान रहते हैं और बिना डॉक्टरी सलाह के दर्द- निवारक गोलियां खाते रहते हैं। दवाइयों की जानकारी पूरी तरह ऐसे लोगों को नहीं होती कि दवा किस मात्रा में और कितने समय के अन्तराल में लेनी है। बस खाते चले जाते हैं।
अधिकतर लोग तो सिरदर्द का कारण जाने बिना काफी समय तक-दर्द निवारक गोलियां हमेशा अपने साथ रखते हैं कि जैसे ही आवश्यकता हुई, निकाली और खा ली। कुछ लोग सिर-दर्द की हल्की शुरूआत होते ही दवा ले लेते हैं कि बाद में तेज दर्द को सहन न करना पड़े। सिरदर्द आपको बार-बार होता है तो इसका कारण अवश्य ढूंढंे और बिना डॉक्टर से परामर्श लिए दवा न लें।
सिरदर्द के कई कारण हैं। इस तनाव भरे और प्रदूषित वातावरण से कोई भी बचा नहीं है। 50 प्रतिशत लोग इस समस्या से ग्रस्त हैं। इसके अलावा सिरदर्द के अन्य कारण माइग्रेन, कब्ज होना, नींद पूरी न होना, हैंगओवर का सिरदर्द, असंतुलित और असमय भोजन लेना, आंखों पर अधिक दबाव होना आदि हैं। कारण को जान लेने के बाद यदि उसी अनुसार दवा ली जाए तो समस्या पर काबू पाने में आसानी हो जाती है।
तनाव वाला सिरदर्द प्रायः अधिकतर लोगों की समस्या है। इस में मांसपेशियों का खिंचाव अधिक हो जाता है जो कई घंटों तक रहता है। तनाव खत्म होने पर सिरदर्द में कमी आ जाती है। ऐसे लोगों को उत्तेजना, बेचैनी और मानसिक दबाव से दूर रहना चाहिए। तनाव भरे सिरदर्द के लिए घरेलू इलाज तेल की मालिश है। मौसम के अनुसार गर्म तेल भी प्रयोग किया जा सकता है। मालिश हल्के हाथों से करनी चाहिए। मालिश से मांसपेशियों का खिंचाव कम हो जाता है। ऐसे में हल्की दवा जैसे पैरासिटामोल, क्रोसिन आदि लें और सोने की कोशिश करें।
बड़े शहरों में देर रात तक चलने वाली पार्टियों और समारोहों का प्रचलन है जिससे लोग मस्ती में शराब और धूम्रपान का प्रयोग कुछ अधिक कर लेते हैं। तेज संगीत पर नाच गाने भी साथ साथ चलते रहते हैं जिससे अगले दिन सुबह हैंगओवर का सिरदर्द हो जाता है। ऐसे में उल्टियां, मितली होती हैं, शरीर अधिक थका हुआ महसूस होता है।
ऐसी अवस्था से बचने के लिए देर-रात की पार्टियों से बचें। जाना आवश्यक हो तो मेजबान को मिलकर चुपके से निकल लें। यदि रुकना आवश्यक हो तो अपने पर संयम रखें। कोशिश करें कि नींद पूरी हो जाए।
आंखों पर अधिक दबाव पड़ने से भी सिरदर्द होता है। अक्सर ऐसी शिकायत बच्चों को अधिक होती है। बच्चों पर पढ़ाई का बोझ होता है और अधिकतर बच्चे पढ़ने के सही तरीकों को नजरअन्दाज करते हैं। अधिक समय टी. वी. देखने से भी आंखों पर दबाव पड़ता है। यदि बच्चे अक्सर सिरदर्द की शिकायत करें तो नेत्र-चिकित्सक को दिखायें । आवश्यकता पड़ने पर चश्मा आदि लगवाएं। बच्चों को आंखों के व्यायाम और पढ़ाई के समय किन बातों का ध्यान करना है, इसकी जानकारी नेत्रा-विशेषज्ञ से दिलवाएं।
कुछ लोगों को सिरदर्द बुखार होने पर, जुकाम होने पर, मासिक धर्म होने पर और मौसम अधिक गर्म या ठंडा होने पर भी हो जाता है। ऐसे लोग आवश्यकता पड़ने पर दर्द-निवारक दवा ले सकते हैं।
असमय भोजन करने से और संतुलित आहार न लेने से भी सिरदर्द होता है। ऐसे में समय के पाबन्द बनिये और संतुलित आहार को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाइए। अधिक कब्ज करने वाली चीजों से भी परहेज करें क्योंकि कब्ज भी सिरदर्द का कारण बन सकती हैं।
माइग्रेन का सिरदर्द सबसे अधिक कष्टदायक होता है। यह सिरदर्द कभी कभी कुछ घंटों से लेकर दो-तीन दिन तक चलता है। इसे आधा सीसी का दर्द भी कहते हैं। ऐसे में सिर पर हथौड़े चलते महसूस होते हैं, बार बार उल्टी आने का मन होता है, आंखों के आगे तारे घूमने लगते हैं, नाक और आंखों से पानी बहने लगता है और नब्ज काफी तेजी से चलती है।
यह सिरदर्द इंसान को बहुत चिड़चिड़ा बना देता है। यह किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है। कुछ लोगों को तो पैतृक भी होता है। ऐसे में लापरवाही न बरतें, तुरन्त डॉक्टर से परामर्श लेकर उचित इलाज करवाएं। अब तो माइग्रेन के लिए कई दवाएं बाजार में उपलब्ध हैं।
सिरदर्द का कारण जाने बिना अपनी इच्छा से दवाइयों का प्रयोग लम्बे समय तक स्वयं न करें। दवाइयां कई प्रकार के साइड इफैक्ट शरीर के अन्य हिस्सों पर डाल सकती हैं। कभी-कभी सिरदर्द का कारण गंभीर समस्या भी होती है जैसे ब्रेन टयूमर, ब्रेन हैमरेज आदि। उचित समय पर उचित इलाज करवाना ही हितकर है। सुदर्शन चौधरी(स्वास्थ्य दर्पण)