

शरद ऋतु के आगमन के साथ हम गर्म वस्त्रों से सर्दी से बचकर मनभावन स्वास्थ्यवर्धक शरद ऋतु को गुजार देते हैं पर हमें यह भी ज्ञान नहीं होता कि शीत ऋतु का हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है।
सूर्य के दक्षिणायन होने से शीत प्रकोप अधिक होता है लेकिन शीतऋतु में चंद्रमा की शक्ति अधिक बढ़ जाती है और हमारे शरीर में अमल, लवण तथा मधुर, इनकी मात्रा बढ़ जाती है। प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथों के अनुसार इस ऋतु में वातजन्य रोग होते हैं लेकिन पित्त शान्त हो जाता है।
शीतल वातावरण के प्रभाव से शरीर में ऊष्मा ठहर नहीं पाती। ऐसे में उदर की जठराग्नि प्रबल होकर आहार को शीघ्रता से पचाने लगती है।
शरद ऋतु में दीपक जलाना, घर को साफ रखना, साफ वस्त्रा पहनना स्वास्थ्य के लिए बड़ा हितकारी है। क्योंकि इस ऋतु में अधिक ठंड पड़ती है, इसलिए लोग बाहर न सो कर अंदर सोना पसंद करते हैं। ऐसी अवस्था में यदि घर साफ न होगा, दीपक न जलाये जायेंगे तथा ओढ़ने-बिछाने तथा पहनने के कपड़े साफ नहीं होंगे अथवा बलदायक भोजन नहीं खाया जायेगा तो आदमी अवश्य बीमार हो जायेगा। पौष्टिक पदार्थों का सेवन कर सेहत बनाने हेतु यह उपयुक्त समय है।
शीतऋतु में वातावरण अधिक शीतल होने के कारण स्त्री , पुरुष तथा बच्चों को अधिक गरम जल से स्नान नहीं करना चाहिए। प्रतिदिन स्नान करने से अधिक स्फूर्ति और उत्साह का अनुभव होता है।
कुछ माताओं के मन में यह भ्रांति है कि शीत ऋतु में गरम जल से बच्चों को स्नान कराने के बाद भी बच्चे खांसी, जुकाम से ग्रसित हो जाते हैं। वास्तव में स्नान से नहीं बल्कि स्नान कराकर खुले वातावरण में बच्चों को ले जाने से शीत का प्रकोप होता है, अतः ऊनी वस्त्रों के उपयोग से लाभ होगा।
त्वचा की शुष्कता, खुरदरापन दूर करने के लिए स्नान से पूर्व शरीर पर तेल की मालिश करें। तेल मालिश से शरीर में रक्त संचार तेज होता है और त्वचा भी कोमल व स्निग्ध बनी रहती है। ठंडी हवाओं के कारण चेहरे पर मलाई, क्रीम का प्रयोग करें। सप्ताह में एक बार बच्चों को धूप में बैठाकर मालिश करने से सूर्य से निकलने वाली किरणों से विटामिन ‘डी‘ मिल जाता है। किरणों की हल्की ऊष्मा से अधिक शक्ति और स्फूर्ति मिलती है।
शीत ऋतु में गुणकारी पदार्थ के रूप में गुड़ लाभदायक सिद्ध होता है। भोजन में हरे पत्ते वाली सब्जियां, मक्का, ज्वार और बाजरे की रोटी के सेवन के साथ प्रातःकालीन भ्रमण नई स्फूर्ति भर देता है। प्रवीन कुमार(स्वास्थ्य दर्पण)