

दांतों का हमारे स्वास्थ्य में अत्यन्त ही महत्त्वपूर्ण योगदान है। यदि हमारे दांत अस्वस्थ हैं व रोगों से संक्र मित हैं तो जो भी भोजन व खाद्य पदार्थ हम खायेंगे, निश्चय ही वह भी रोगयुक्त होकर हमारे भीतर पहुंचेगा। दांतों की सही देखभाल सुचारू रूप से न होने के कारण ही दांत शीघ्र खराब होकर हिलने लगते हैं व दांतों में 'पायरिया' हो जाता है। बाद में रोगयुक्त दांत गिरने लग जाते हैं। ऐसी स्थिति में खान-पान पर भी असर पड़ता है व दांत के रोगी को कृत्रिम दांतों का सहारा लेना पड़ता है।
लापरवाही ही सबसे ज्यादा हानिकारक
दांतों की देखभाल में बरती गयी लापरवाही ही सबसे ज्यादा हानिकारक होती है। यूं भी आजकल हमारा खान पान ऐसा हो गया है जिससे दांत प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाते। हमारे प्रतिदिन के भोजन में शक्कर व कार्बोहाइड्रेट की मात्रा इतनी ज्यादा बढ़ गयी है जिससे दांत सर्वाधिक प्रभावित होने लगे हैं। प्राय: खाने में मिठाई, पेस्ट्री, जैली, चॉकलेट इत्यादि के सूक्ष्मकण हमारे दांतों में फंसे रह जाते हैं व हम ब्रश या कुल्ला न कर इन्हें नजरअंदाज करते रहते हैं व जल्दबाजी में यह भूल जाते हैं कि कुछ भी खाने के बाद दांतों की सफाई भी जरूरी है! हमारे दांतों के बीच फंसे हुए खाद्य पदार्थों के कण हमारी मुखगुहा के भीतर पाये जाने वाले जीवाणु शीघ्र ही सडऩा शुरू कर देते हैं जिससे अम्ल बनने लगता है और यही दांतों को गलाकर कमजोर बनाता है। इस प्रक्रिया में सर्वप्रथम दांतों पर भूरे व काले निशान बनने लगते हैं व रोगी को कोई परेशानी नहीं होती लेकिन आगे चलकर दांतों पर टारटर की परतें जमना शुरू हो जाती हैं व बीच से दांत खोखला होने लगता है, बस! यहीं से दंतक्षय की बीमारी शुरू हो जाती है।
समय रहते ध्यान देना जरूरी
यदि समय रहते दांतों पर ध्यान न दिया जाये तो निश्चय ही स्थिति दुखदायी बनती है चूंकि अम्ल डैंटीन को गलाना शुरू कर देता है व दांतों में गड्ढे बन जाते हैं। धीरे-धीरे रोग मसूड़ों में भी फैल जाता है व दांतों की जड़ों के पास मवाद भरने लगता है और मसूड़े सूज जाते हैं। हालांकि आजकल दांतों को स्वस्थ बनाये रखने के लिए इलाज संभव है तथा रुट कैनाल ट्रीटमेट व एपीसैक्टोमी नामक शल्य-क्रिया से दांत भी सुरक्षित किये जा सकते हैं किंतु बेहद स्थिति बिगड़ने पर दांतों को निकलवा देना ही उचित होता है।
ठीक से सफाई नहीं होने से संक्रमण होता है
दांतों की प्रतिदिन भली प्रकार से सफाई न करने से ही दांतों में संक्रमण होता है। मसूड़ों से रक्तस्राव होना, दुर्गंधयुक्त लार निकलना, सांसों में बदबू आना, भोजन का स्वाद खराब लगना इत्यादि ऐसे लक्षण हैं जिससे परिचित होते ही दांतों के चिकित्सक के पास पहुंच जाना चाहिए। समयानुसार इलाज कराने से काफी हद तक सफलता मिल जाती है व डाक्टर रोगों को बढऩे से छुटकारा दिलवा सकता है। समय-समय पर दांतों पर जमने वाले टारटर को साफ कर पॉलिश करवाना लाभप्रद होता है। साथ ही माउथवाश व एंटीबायटिक द्वारा भी उपचार जरूरी होता है।
यूं देखा जाये तो बहुत कम ऐसे लोग मिलेंगे जिनके दांतों की बनावट बहुत ही सुन्दर हो। प्राय: दांत टेढ़े मेढ़े व बाहर निकले हुए दिखाई देते हैं या फिर ज्यादा ही बढ़े हुए टेढ़े मेढ़े दांतों को भी आजकल कटिंग कर ठीक कर दिया जाता है या फिर टैंशन वायर बांध कर इलाज होता है।
नीम के दातून
दांतों को असमय गिरने से बचाने के लिए जरूरी है कि दांतों की सफाई में हमेशा सतर्कता बरतें, दांतों का पूरा ध्यान रखें व खुरदरे मंजन इत्यादि न करें। जहां तक हो सके, अच्छे ब्रश से दांत ऊपर से नीचे तक साफ करें व माउथवाश से कुल्ला करें। समय-समय पर टूथपेस्ट भी बदल दें। यदि दांत मजबूत हैं तो नीम के दातून से बढ़िया कुछ भी नहीं है।
विटामिन 'सी' का भरपूर उपयोग करें
खाने-पीने की वस्तुओं का भी ध्यान रखें। न तो ज्यादा गर्म-खायें व न ही ठंडा पीयें। जहां तक हो सके, शक्कर का उपयोग कम करें व मीठी चीजों का त्याग करें। सभी खाद्य पदार्थ चबा कर खायें। विटामिन 'सी' का भरपूर उपयोग करें। कच्चे फल व सलाद खूब खायें, लेकिन इसके तुरन्त बाद ब्रश करें। तम्बाकू व गुटका न ही खायें तो अच्छा है।
डॉक्टर को दिखायें
अगर दांतों में कुछ फंस गया हो तो दांतों को ऑलपिन या सुई से न कुरेदें बल्कि 'डेंटल फ्लास' से साफ करें। दांत में रोग होते ही फौरन डॉक्टर को दिखायें। जहां तक हो सके, एन्टीबायोटिक दवाइयां कम ही लें क्योंकि इनका सीधा असर दांतों पर पड़ता है। यदि आपके दांत स्वस्थ व मजबूत होंगे तो आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा व आपका हंसता-मुस्कराता चेहरा भी आकर्षक लगेगा। चेतन चौहान(स्वास्थ्य दर्पण)