मासिक धर्म की पीड़ा...

क्या उपाय करें
मासिक धर्म की पीड़ा
मासिक धर्म की पीड़ामासिक धर्म की पीड़ा
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आमतौर पर अधिकतर महिलाओं को इस काल में अत्यधिक पीड़ा होती है, खास तौर से कुंवारी लड़कियों को। इसका मुख्य कारण है अनुचित आहार से जननांगों पर सूजन आ जाना तथा शरीर के आन्तरिक ताप का उचित न होना।

अधिकतर महिलाएं इस काल में सही भोजन का इस्तेमाल नहीं करती, साथ ही नहाने-धोने का विशेष रूप से ख्याल नहीं रखती और दर्द की शुरूआत होते ही पीड़ाहारी औषधि का प्रयोग करती हैं जो बहुत ही हानिकारक है। इस काल में अधिकतर महिलाओं का चेहरा पीलापन तथा उदासी लिए रहता है, साथ ही दिमागी तनाव के कारण स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है।

साधारण सी सावधानियां बरतने पर इस पीड़ा से छुटकारा मिल सकता है। इस तरह का दर्द शुरू होते ही एक चाय की चम्मच शुद्ध हल्दी (गांठ पीस लें) ताजे पानी से फांक लें। कुछ ही पलों में आपको आराम का अनुभव होगा। इससे मासिक धर्म खुलकर होगा। हो सकता है कि पहले से आपको गर्भाशय पर काफी सूजन हो, इस कारण फिर से दर्द होने लगे। इस के लिए आप इस काल में कम से कम तीन दिन सोते समय एक चम्मच हल्दी का उसी प्रकार नियमित रूप से सेवन करते रहें।

इस काल के भोजन में चावल, दही जैसी ठंडी चीजों का सेवन कदापि न करें। कुछ महिलाएं इस काल में कड़क चाय का काफी प्रयोग करती हैं जो स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। यदि आप चाय का प्रयोग करें तो हल्की पत्ती के साथ आधा चम्मच अजवायन डालकर चाय बनाएं। कड़क चाय का प्रयोग बिलकुल न करें। इससे पाचन क्रिया बुरी तरह प्रभावित होती है और यह शारीरिक अस्वस्थता को जन्म देती है। ताजा पानी दिन में कम से कम 10 गिलास इस्तेमाल करें। सर्दियों में गुनगुने पानी का प्रयोग करें (ताजा पानी उपलब्ध न होने पर)। यदि इस पानी को लौंग मिलाकर खौला कर पीयें तो बेहतर होगा।

हमेशा साफ कपड़े का इस्तेमाल करें। हो सके तो सेनेटरी नेपकिन प्रयोग करें तथा गीला होने पर तुरंत बदलें। नहाते समय पेड़ू पर ठंडा पानी न जाने दें। गुनगुने पानी से नहायें। याद रखिए मासिक स्राव के समय सफाई का विशेष ध्यान रखें क्योंकि अस्वच्छता ल्यूकोरिया जैसी बीमारी को जन्म देती है। आरती सिंह(स्वास्थ्य दर्पण)

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