

वसा का सेवन आवश्यक है पर...
विशेषज्ञों के अनुसार अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है आपका बीएमआई अर्थात बॉडी मास इंडेक्स का सामान्य रहना और वजन नियंत्रण रहना। वसा का अधिक होना वजन बढ़ने का मुख्य कारण होता है। वसा का सेवन आवश्यक है पर इसे सीमित मात्रा में लें। वसा एक इन्स्युलेटर के रूप में कार्य करती है और पेट में वसा की थोड़ी मात्रा आंतरिक अंगों को एक दूसरे से सुरक्षित दूरी पर रखती है।
वसा से शरीर को ऊर्जा की प्राप्ति होती है। व्यक्ति के अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है कि शरीर में वसा व मांसपेशियों का अनुपात संतुलित हो और जब यह असंतुलित होने लगता है तो समस्या प्रारंभ होती है। वंशानुगत कारण, निष्क्रि य जीवन शैली, धूम्रपान, अल्कोहल का सेवन व तनाव आदि कई कारण हैं जो शरीर में वसा की मात्रा को बढ़ा देते हैं और यह वसा मुख्यत: पेट में चर्बी के रूप में चढ़ने लगती है और आपका बॉडी मास इंडेक्स भी बढ़ने लगता है।
एब्डोमिनल फैट
बॉडी मास इंडेक्स से यह निर्धारण हो जाता है कि आप मोटापे का शिकार हैं और किस स्तर तक। पेट पर चढ़ी चर्बी शरीर के अन्य भागों पर चढ़ी चर्बी से अधिक हानिकारक होती है। विशेषज्ञों के अनुसार पेट पर चढ़ी चर्बी जिसे सेंट्रल ओबेसिटी या एब्डोमिनल फैट भी कहते हैं, बहुत खतरनाक वसा होती है क्योंकि इससे व्यक्ति को मधुमेह, हृदय रोग होने व पक्षाघात होने की संभावना बढ़ जाती है।
भोजन की महत्त्वपूर्ण भूमिका
मांसपेशियों के निर्माण में, टिश्यूज़ को ठीक करने में और एनर्जी उत्पन्न करने में भोजन महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है पर जब शारीरिक श्रम कम होता है और भोजन की मात्रा अधिक तो हमारा शरीर वसा उत्पन्न करना प्रारंभ कर देता है। फैट टिश्यू का निर्माण अधिक बड़ा आकार लेने लगता है जिससे मांसपेशी टिश्यू सिकुडऩे लगती हैं। परिणामस्वरूप हमारा शरीर कैलोरी खर्च करने की प्रक्रिया धीमी कर देता है और शरीर की चयापचय क्रि या की गति भी धीमी हो जाती है।
शरीर में दो गेस्ट हाउस
डाइटीशियंस के अनुसार भोजन हमारे शरीर में एक मेहमान की तरह है और इस मेहमान के लिए हमारे शरीर में दो गेस्ट हाउस हैं फैट गेस्ट हाउस और मसल गेस्ट हाउस। फैट गेस्ट हाउस सब तरह के मेहमानों का स्वागत करता है जैसे सभी प्रकार की संतृप्त वसा, जटिल कार्बोहाइड्रेट्स आदि अर्थात् आटे की ब्रेड से लेकर पेस्ट्री, केक, कुकीज, बिस्कुट, आइस्क्रीम, फास्ट फूड आदि जबकि मसल गेस्ट हाउस बहुत ही नखरेबाज होता है और सिर्फ अच्छे मेहमानों अर्थात् अनाज, फल व सब्जियों आदि का ही स्वागत करता है। एक शोध के अनुसार डीप एब्डोमिनल फैट एचडीएल कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम करती है और इस अच्छे कोलेस्ट्रोल का कम स्तर हृदय रोगों व कई प्रकार के कैंसर की संभावना को बढ़ा देता है।
एब्डोमिनल ओबेसिटी
एब्डोमिनल ओबेसिटी (पेट पर वसा का जमाव) टाइप 2 डायबिटीज होने की संभावना भी बढ़ाता है। अत्यधिक चर्बी इंसुलिन के कार्य में बाधा डालती है। यह एक हार्मोन रेसीसटीन उत्पन्न करती है जो इंसुलिन के कार्य को धीमा करती है जिससे शरीर में रक्त शर्करा की मात्र अधिक होने लगती है। यही नहीं, टाइप टू डायबिटिस पर अगर नियंत्रण न पाया जाए तो यह आंखों व गुर्दो को गंभीर क्षति पहुंचाती है। रेसीसटीन के स्तर को कम करने का उपाय है कि पेट की चर्बी को कम किया जाए और इसके लिए सबसे अच्छा उपाय है व्यायाम।
वयस्क ही नहीं, बच्चे भी मोटापे का शिकार हैं और इसीलिए बच्चों में भी टाइप टू डायबिटीज होने की संभावना अधिक हो गई है जबकि पहले टाइप टू डायबिटीज वयस्कों में ही अधिक देखने को मिलती थी।
एब्डोमिनल ओबेसिटी
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि जहां पुरुषों में एब्डोमिनल ओबेसिटी का कारण धूम्रपान, अल्कोहल का सेवन और निष्क्रिय जीवन शैली है वहीं महिलाओं में इसका प्रमुख कारण तनाव है। एक अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य पत्रिका में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार जिन महिलाओं में अधिक एब्डोमिनल फैट पाया गया, वे अपने जीवन में अधिक तनावग्रस्त भी पाई गई।
जरूरी है व्यायाम
इस बढ़े हुए पेट से सुरक्षा पाने के लिए सबसे जरूरी है व्यायाम। सक्रिय जीवनशैली व स्वस्थ खान-पान की आदतें अपना कर भी आप बहुत हद तक अच्छा स्वास्थ्य पा सकते हैं व गंभीर रोगों से सुरक्षा पा सकते हैं। सोनी मल्होत्रा(स्वास्थ्य दर्पण)