बच्चों के दांतों का रखें ख्याल

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देखा गया है कि लोग दांतों के प्रति काफी लापरवाह रहते हैं जबकि दांत मानव शरीर का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनका भी नियमित चेकअप होना जरूरी है लेकिन बहुत कम लोग ही अपने दांतों का नियमित चेकअप कराते हैं। बचपन से ही यदि दांतों की केयर की जाये तो आगे दांतों को इतनी जल्दी कोई परेशानी भी न आये किन्तु बच्चों के दांतों की भी कोई देखभाल नहीं की जाती। कुछ ही बच्चों को डेंटल केयर मिलती है जबकि बच्चों को शुरू से ही अपने दांतों को साफ करने की आदत डालनी चाहिए ताकि आगे चलकर उन्हें कोई परेशानी न हो।

जब बच्चे के दांत आने लगते हैं, तभी से उनका ध्यान रखने लगें। ऐसे में बच्चों को हर चीज मुंह में देने की आदत पड़ जाती है। वे अंगूठा भी चूसने लगते हैं। ऐसा करने से उन्हें आराम मिलता है लेकिन यदि अंगूठा चूसने की आदत चार-पांच साल तक न छूटे तो गलत है। इससे अंगूठा तो कमजोर होगा ही, दांतों का आकार भी खराब हो सकता है। तब दांतों को सामान्य आकार देने में कई बार ब्रेसेस की जरूरत पड़ती है। बच्चे को अंगूठा छुड़ाने के लिए शहद का निप्पल वगैरह न दें। यह और भी नुकसानदायक होगा।

जब बच्चा चलना सीखता है तो वह कई बार गिरता भी है। इस कारण उन्हें कई बार मुंह की चोटें भी लगती हैं। ऐसे में उन्हें ज्यादा केयर की जरूरत पड़ती है। उन्हें गिरने से बचाना चाहिए। छोटी-मोटी चोट लगने पर डॉक्टर के पास ले जाने की जरूरत नहीं होती लेकिन यदि मसूड़ों में गंभीर चोट लग जाये तो तुरंत डेंटिस्ट के पास ले जायें।

बच्चें के भोजन में ऐसी चीजें रखें जिनसे उसके दांतों को कोई नुकसान न पहुंचे। उन्हें ऐसे स्नैक्स दें जिनमें कम चीनी हो और चिपकने वाले न हों। टॉफी आदि जैसे चिपचिपे खाद्य पदार्थ न दें। इनके अंश बच्चों के मसूड़ों और दांतों में चिपक जाते हैं जो धीरे-धीरे उन्हें नुकसान पहुंचाते जाते हैं।

लगभग छः महीने की उम्र में बच्चे के दांत निकलने लगते हैं। जब दांत दिखाई देने लगें तो उन्हें साफ एवं मुलायम गीले कपड़े से साफ करते रहना चाहिए। दो साल की उम्र से दांतों को ब्रश से साफ किया जाना चाहिए मगर उसमें पेस्ट नहीं लगाना चाहिए। छः सात साल की उम्र के बाद ही बच्चे को ब्रुश पर पेस्ट लगाकर देना चाहिए। पेस्ट में मौजूद फ्लोराइड उनके दांतों को कमजोर बनाता है और उनकी सफेदी छीन सकता है। जब उनके दांत छः सात साल की उम्र में मजबूत हो जाते हैं तब वे पेस्ट में मौजूद फ्लोराइड झेल लेते हैं।

बच्चे ब्रश करने में अक्सर आनाकानी करते हैं। उन्हें किसी भी तरह ब्रश करने के लिए मनायें। विभिन्न आकार के ब्रश बच्चों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। उन्हें नये डिजाइन के ब्रश लाकर दें जिससे वे दांत साफ करने के लिए आसानी से राजी हो जायें। वे अगर अपने हाथ से ब्रश करना चाहते हैं तो उन्हें करने दें। आप अपने दांत साफ करके उन्हें दिखायें कि वे किस तरह से अपने दांतों को साफ करें।

यदि दांतों को नियमित साफ नहीं करेंगे तो उनमें बैक्टीरिया पनपने लगेंगे। फिर इनसे छुटकारा पाना मुश्किल हो जायेगा। सोते समय रात को बच्चे को दूध पिलाना या बोतल को उसके मुंह से न हटाना, सब बैक्टीरिया को बढ़ावा देने का काम करते हैं।

बच्चों को दूध पिलाने के बाद किसी मुलायम गीले कपड़े से उनके मुंह को पोंछ देना चाहिए। यदि दांत निकल चुके हों तो उसे कुल्ला करके सोने के लिए कहें। बेहतर हो कि वह रात को भी ब्रश करके सोए। इससे उसमें एक अच्छी आदत का विकास होगा।

कभी-कभी ऐसी परिस्थिति भी सामने आ जाती है जिसके बारे में हम कभी नहीं सोचते। इसलिए एमरजेंसी के लिए डेंटिस्ट का मोबाइल नम्बर अपनी डायरी में जरूर नोट करके रखें। कभी अचानक चोट लगने पर दांत टूट जाए तो तुरंत डेंटिस्ट के पास जाएं। एक घंटे के भीतर यदि इसका कोई इलाज हो जाये तो इसके दोबारा लगाने के ज्यादा चांसेज रहते हैं नहीं तो कई बार इसे लगाने का समय निकल जाता है और आगे चलकर नकली दांत लगवाना पड़ता है।

वैसे भी हर छः महीने बाद अपने दांतों का चेकअप कराते रहना चाहिए और बच्चों के दांतों की भी लगातार केयर करनी चाहिए ताकि वे अपने दांतों के प्रति आगे चलकर लापरवाह न बनें। शिखा चौधरी(स्वास्थ्य दर्पण)

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