

सिरदर्द के बाद सबसे अधिक होने वाला दर्द है पीठ दर्द। पीठ दर्द होने के प्रमुख कारण
हैं अधिक वजन उठाना, अधिक झुकना, खड़े होने का गलत ढंग और गर्भावस्था के
समय मोटापा आदि।
कभी-कभी यह दर्द डिस्क प्रोलेप्स के कारण भी होता है। इस कारण से होने वाले दर्द
का इलाज डाक्टर से तुरन्त कराना चाहिए। इस दर्द का एक प्रमुख कारण होता है
चुक निकल जाना। आप एकदम से झुकें या आपने जल्दबाजी में कोई ऐसा कार्य
किया और पीठ का बल निकल गया।
हमारी रीढ़ की हड्डी बहुत-सी हड्डियों से मिलकर बनी होती है जिसमें से अंतिम 9
हड्डियां मिलकर एक पूंछ की आकृति बनाती हैं। यहीं पर एक नर्म कुशन होता है जो
दबाव को सहता है। इस कुशन को इंटरवर्टीबरल डिस्क कहते हैं। यहीं से नसें शरीर
के विभिन्न भागों को जाती हैं। रीढ़ की हड्डी को बहुत सारी मांसपेशियां सहायता
देती हैं जिसके कारण ये मजबूत होती हैं। अगर ये मांसपेशियां कमजोर हो जाएं तो
भी पीठदर्द हो सकता है।
इसके अतिरिक्त पीठदर्द के कारणों में गलत ढंग से खड़ा होना, गलत ढंग से बैठना, गलत
ढंग से सोना, गलत ढंग के जूतों को पहनना, सोते समय बिस्तर के गद्दों का सही
न होना, गलत ढंग से चीजों को उठाना, झुकना या मुड़ना आदि शामिल हैं।
कारणों के अनुसार ही पीठ दर्द का इलाज किया जाता है परन्तु इस दर्द से बचाव के
लिए जरूरी है कि आप सीखें कि आपको किस तरह से कार्य करना है। फिजियोथेरेपी
द्वारा भी पीठ दर्द का इलाज किया जाता है। किसी-किसी दर्द में डायथर्मी, एक्यूप्रेशर
और एक्यूपंचर भी लाभप्रद होते हैं। कभी-कभी तो शल्य क्रिया तक की जरूरत पड़
जाती है। इसलिए पीठ दर्द की संभावना को कम करने के लिए कुछ बातों का ध्यान
रखना जरूरी है।
अगर आप सही ढंग से बैठते हैं तो आपको यह समस्या नहीं आएगी। कभी-कभी
लगातार बैठे रहने से आपको दर्द महसूस होने लगता है इसलिए आप लगातार कार
ड्राइविंग कर रहे हैं या बस या ट्रेन में लंबा सफर कर रहे हैं तो बीच-बीच में खड़े
होकर दो चार कदम अवश्य चलें। इसी तरह सिनेमाघर में भी बैठते समय सीट पर
इस तरह बैठें कि आपकी पीठ को आराम मिले। लगातार तने हुए बैठे रहने से भी
मांसपेशियां थकान महसूस करती हैं, इसलिए लगातार अधिक समय तक न बैठे रहें।
बीच-बीच में थोड़ा-सा अवश्य चलें।
जिस कुर्सी पर आप बैठें, वह आरामदायक होनी चाहिए। जब भी कुर्सी पर बैठें, यह
ध्यान रखें कि आपका पैर पूरा जमीन से टिका हो। कार चलाते समय अपनी पीठ के
पीछे कोई कुशन रख लें।
अपने सोने के ढंग में भी परिवर्तन लाइए। कड़े गद्दे का प्रयेाग करें। बहुत अधिक मोटे
तकिए सिर के नीचे न रखें। पेट के बल न लेटें नहीं तो पीठ दर्द हो सकता है।
दोनों पैरों पर बराबर वजन रखते हुए खड़े हों। यह नहीं कि एक पैर पर आपके पूरे शरीर
का बोझ हो। बहुत ऊंची एड़ी के सेंडिल भी न पहनें।
कोई चीज नीचे गिर जाने पर आप पीठ पर जोर डालते हुए झुकते हैं। इससे आपकी
पीठ पर जोर पड़ता है। जब भी आप झुकें तो घुटनों के बल झुकेें और पीठ सीधे
रखते हुए झुकें। एकदम झटके से न बैठें, न उठें।
पीठ के व्यायाम करने से मांसपेशियों में मजबूती आती है।
पीठ दर्द न हो, इसके लिए जरूरी है कि बहुत अधिक समय एक तक ही स्थान पर न
बैठें। अगर आप क्रियाशील रहते हैं तो आपकी मांसपेशियां काम करती हैं और
मजबूत बनती हैं। सोनी मल्होत्रा(स्वास्थ्य दर्पण)