

दुर्गंध क्यों आती है ?
पसीना मूलतः गंधहीन होता है, लेकिन जब इसका वाष्पीकरण नहीं हो पाता, तो त्वचा पर मौजूद जीवाणु (बैक्टीरिया) पसीने में मौजूद वसा और प्रोटीन के साथ क्रिया करके उसे दुर्गंध में बदल देते हैं।
बचाव के प्रभावी उपाय
वस्त्रों की स्वच्छता : पसीने वाले कपड़े दोबारा बिना धोए न पहनें। कपड़ों पर लगे बैक्टीरिया ही दुर्गंध का मुख्य कारण होते हैं।
नियमित स्नान : गर्मियों में दिन में दो बार नीम या डेटॉल युक्त साबुन से नहाएं। नहाने के पानी में सफेद सिरका या यूडीकोलोन की कुछ बूंदें मिलाने से बैक्टीरिया नियंत्रित रहते हैं।
पाउडर का प्रयोग : शरीर सुखाकर टेलकम पाउडर लगाएं। ध्यान रहे कि स्टार्चयुक्त पाउडर के बजाय सामान्य पाउडर का प्रयोग करें ताकि चिपचिपाहट न हो।
डिओडोरेंट और एंटीपरस्पायरेंट :
डिओडोरेंट : दुर्गंध को दबाता है और बैक्टीरिया की वृद्धि रोकता है।
एंटीपरस्पायरेंट : पसीने को आने से रोकता है और कीटाणुओं का नाश करता है (प्रयोग से पहले पैच टेस्ट जरूर करें)।
धूप से बचाव : कड़ी धूप से बचें और बाहर निकलते समय छतरी का प्रयोग करें। यह न केवल पसीना कम करेगा बल्कि त्वचा को यूवी किरणों से भी बचाएगा।
खान-पान और जीवनशैली
संतुलित आहार : अधिक मिर्च-मसाले और तली-भुनी चीजों से बचें। दही, सलाद और मौसमी फलों के रस का सेवन करें।
जलयोजन (Hydration): दिन में 10-12 गिलास पानी पिएं। शरीर में नमक का संतुलन बनाए रखने के लिए नींबू-पानी और नमक का घोल लें।
पहनावा : तंग और सिंथेटिक कपड़ों के बजाय ढीले-ढाले सूती कपड़े पहनें, ताकि हवा का संचार बना रहे और पसीने का वाष्पीकरण आसानी से हो सके।
निष्कर्ष : स्वच्छता, सही पहनावा और खान-पान में थोड़े से बदलाव करके आप पसीने की असहनीय दुर्गंध से आसानी से छुटकारा पा सकते हैं।
नवतेज सिंह खड़तोल
(स्वास्थ्य दर्पण)