तनाव एक विष है, इससे बचिये

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तनाव एक विष है, इससे बचिये
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आज के इस व्यस्तता भरे जीवन में कोई विरला ही होगा जो किसी न किसी समस्या या कठिनाई से घिरा हुआ नहीं है। जब प्रयत्न करने पर भी कोई मनुष्य समस्या या कठिनाई से पीछा छुड़ा पाने में असमर्थ रहता है तो वह निराश हो जाता है। ऐसी स्थिति में मानसिक द्वन्द्व के कारण व्यक्ति तनावग्रस्त रहने लगता है।

तनाव की स्थिति से बचना हितकर है। इस बात को हम अच्छी तरह जानते हैं कि हमारे चाहने से न तो हर काम में हमें सफलता मिल सकती है और न ही चाहने से कोई अप्रिय घटना होने से टल सकती है लेकिन फिर भी हम इससे तनावग्रस्त हो जाते हैं। चिंता और निराशा के क्षण तो जीवन में आते-जाते रहते हैं।

वैज्ञानिकों के मतानुसार लगातार तनावग्रस्त रहने वाले व्यक्ति एज्मा और एलर्जी के शिकार बड़ी आसानी से हो जाते हैं। तनाव के कारण मांसपेशियों में खिंचाव आता है जिसके कारण वे पीठ दर्द या कमर दर्द के रोगी हो जाते हैं।

निराशावादी या नकारात्मक चिन्तन के कारण कैंसर का खतरा बना रहता है। तनाव से लगातार घुटते रहने के कारण पेट में ट्यूमर की संभावना रहती है। ब्लड प्रेशर और हृदयरोग के शिकार हो जाना तो आम बात है। तनाव का रोगी मानसिक रूप से असंतुलित रहता है, अनिद्रा का शिकार हो जाता है और स्मरण शक्ति का ह्रास हो जाता है। ऐसे व्यक्ति अपच और अरुचि के शिकार रहते हैं।

तनाव के विष से बचने के उपाय हमारे पास ही हैं। इससे छुटकारा पाने के लिये निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना जरूरी है-

हंसी खुशी का जीवन

जो लोग मुसीबत और चिंताओं भरे वातावरण में भी खुश रहते हैं, वे जिन्दादिल होते हैं परन्तु जो लोग छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर भी चिंताओं और दुखों में जीने लगते हैं, वे जीवन में दुख और तनाव के अलावा कुछ नहीं पा सकते। वे बराबर दुख, अशांति और असंतोष की बातें करते रहते हैं और अपने दुख से दूसरों को भी दुखी करते हैं।

यह बात याद रखिये कि नकारात्मक सोच वालों को खुशियां नहीं मिलतीं, इसलिये अभावग्रस्तता या कठिन परिस्थिति आने पर विचलित मत होइये बल्कि ऐसे समय को हंसते-मुस्कुराते काट दीजिये। याद रखिये हर काली रात में बाद चमचमाता सवेरा आता है। यही आशावादी विचार मन में बैठाये रखिये। यह तनावशमन में आपका सहायक सिद्ध होगा।

सकारात्मक सोच

जीवन में तनावमुक्त रहने के लिये यह बहुत जरूरी है कि आपकी सोच सकारात्मक हो क्योंकि कोई भी काम अच्छी मनोधारणा और सोच के साथ शुरू किया जाये तो वह पूरा होता है और ऐसी सोच से मनमस्तिष्क बोझिल और तनावग्रस्त भी नहीं होता। नकारात्मक सोच वाला व्यक्ति गलत प्रवृत्तियों की ओर अग्रसर होता है। भय, आतंक, क्रोध, ईर्ष्या, दुख आदि नकारात्मक मनोवेग हैं। क्रोध मनुष्य को हिलाकर रख देता है और मस्तिष्क को तनाव आक्रांत बना देता है। नकारात्मक विचारों को त्यागिये, शुभ-शुभ सोचिये।

व्यायाम

तनाव की स्थिति से बचने के लिये व्यायाम करें। दौड़ लगायें या लम्बी सैर के लिये निकल पड़ें। टहलना, अनेक बीमारियों के उपचार के लिये सबसे अच्छे व्यायामों में से एक के रूप में सामने आ रहा है। टहलने से आप तनाव से मुक्ति पा सकते हैं। अनुसंधानों से पता चला है कि कुछ मिनट तक टहलकर व्यक्ति न सिर्फ ज्यादा शांत हो जाता है बल्कि इससे उसे अधिक ऊर्जा भी प्राप्त होती है। योग भी उत्तम है।

ध्यान

मन बहलाव के साधनों को बढ़ायें। तनाव पालने से कोई लाभ नहीं है। जब मन ऊबने जैसी हालत आये तो एक ही विषय पर केन्द्रित न रहें। वातावरण, मूड और विषय बदलने से ध्यान बंटता है और सुख की अनुभूति होती है। फालतू समय में संगीत सुनना, प्रकृति के निकट रहना, हंसना-हंसाना, टहलना, पुस्तक पढ़ना आदि से ध्यान चिंताओं से हट जाता है। एकान्त त्यागें। संगी साथियों के साथ मिलकर हंस बोलकर जीवन का आनंद उठायें।

गहरी सांस

तनाव से मुक्ति पाने का सबसे आसान और असरदार तरीका है गहरी सांस लेना। जब आप केवल छाती तक ही नहीं बल्कि पेट तक गहरी सांस खींचते हैं तो सांस लेने और छोड़ने में आपके फेफड़े के निचले हिस्से भी सक्रिय होते हैं। इससे शरीर ज्यादा आक्सीजन ग्रहण कर पाता है और रक्त में ज्यादा आक्सीजन का मिश्रण होता है। इस प्रक्रिया में ज्यादा ’एंडोरफिंस‘ भी बनते हैं जो हमारे हारमोनों को तनावमुक्त करने के प्राकृतिक साधन हैं। उपरोक्त साधनों पर अमल कीजिये और तनावमुक्त रहिये। परशुराम संबल(स्वास्थ्य दर्पण)

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