

तनाव किसी जहर से कम नहीं है जो शरीर को धीरे-धीरे नष्ट करता है। इसके चंगुल में फंस कर तनावग्रस्त होने से इंसान को कई मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। मनुष्य मानसिक रोगों से ही पीडि़त नहीं हो जाता बल्कि कई भयंकर बीमारियों का भी शिकार हो जाता है जिससे जल्दी छुटकारा पाना मुश्किल हो जाता है। आइए हम आपको तनाव के इस चक्र व्यूह में फंसने से बचने के लिए कुछ जानकारी दें।
बेवजह बिना सबूत के किसी पर शक न करें क्योंकि शक एक जहर के समान है जो व्यर्थ ही तनाव उत्पन्न करता है, परेशानियां बढ़ती हैं। साथ ही अच्छे मजबूत संबंधों को भी बिगाड़ देता है, उनमें दरार पैदा कर देता है।
आपके सामने कोई परेशानी हो जाय तो उसे सुलझाने की कोशिश कीजिए न कि बहुत परेशान होने की क्योंकि ज्यादा परेशान होने से बनने वाला काम और बिगड़ जाता है। इससे दुख होता है जिसका सीधा असर शरीर पर पड़ता है।
तबीयत ठीक न होने पर छोटी-छोटी बातों को गहराई से न लें। उन पर ज्यादा विचार न करें। कारण ज्यादा विचार करने या परेशान होने पर आपका मानसिक संतुलन बिगड़ सकता है। सिरदर्द, उदासी व घबराहट जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कमर दर्द से भी पीडि़त हो सकते हैं। सामान्य मरीज होने के बावजूद आप अपच व कब्ज के भी शिकार हो सकते हैं। बेहतर तो यही होगा कि आप उस समय शांत रहें और आराम करें।
कभी किसी से अनावश्यक झगड़ा न करें। अगर ऐसी स्थिति निर्माण हो जाये तो उससे समझौता करने की कोशिश करें और बात को अधिक न बढ़ाकर वहीं खत्म करें। इससे आप तनावग्रस्त होने से बच सकते हैं।
प्रतिदिन थोड़ा घूमें, पैदल चलें, मधुर संगीत सुनें और सुविचार वाली पुस्तकेें पढ़ें। ज्यादा दुखी व चिंतित न रहें। किसी को सुनकर अपशब्द न कहें। इससे आप तनाव से बच सकते हैं।
ऑफिस जाते समय कहीं ट्रैफिक जाम हो जाने पर ज्यादा परेशान न हों कि ऑफिस पहुंचने में लेट हो जाएंगे। दफ्तर से निकलने के बाद यह भूल जाइए कि आज ऑफिस में सब अच्छा ही हुआ। यदि आप वहां हुए किसी विवाद या काम को लेकर बेचैन रहेंगे तो जरूर तनावग्रस्त हो सकते हैं।
घर का सारा काम करने के चक्कर में यदि कोई काम अधूरा रह जाता है या बिगड़ जाता है तो उस पर गहराई से न सोचें क्योंकि आप कितना भी कोशिश करें, कई काम ऐसे होते हैं जो तुरन्त पूरे नहीं होते। इससे तनाव बढ़ता ही जाता है।
यदि किसी कारणवश तनाव की स्थिति आ जाये तो उस समय धैर्य से काम लें क्योंकि ज्यादा तनावग्रस्त हो जाने से इंसान मानसिक रोगों से पीडि़त हो जाता है। यहां तक कि कई व्यक्ति तनाव के कारण कैंसर के मुंह में समा जाते हैं।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार तनाव एक अभिशाप है जो व्यक्ति इसके शिकंजे में आ जाता है उसके शरीर का नाश होता जाता है। स्वास्थ्य गिर जाता है और वह कई रोगों की गिरफ्त में आ जाता है।
छात्र-छात्राओं को भी चाहिए कि वे परीक्षा की पूरी तैयारी न होने पर भी आत्मविश्वास रखें। जयादा तनाव में आकर पढ़ाई न करें और परीक्षा देते समय घबरायें नहीं। घबराने से अच्छा पेपर बनने वाला भी बिगड़ जाता है। माता-पिता को भी चाहिए कि वे किसी भी समय उन्हें उल्टी-सीधी, दिल को दुखाने वाली बात कहकर निराश न करें, उन पर दबाव न डालें या घूर कर न देखें वरना वे तनावग्रस्त हो जायेंगे और इसका असर परीक्षा में भी पड़ेगा।
कई लोग किसी के दिल को चुभने वाली बात कह देते हैं और बात को तिल का ताड़ बना देते हैं। इससे सदा दूर रहें।
यदि आप गृहिणी हैं और घर का सारा काम आप ही को तनाव में रहकर करना पड़ता है तो कभी-कभी ज्यादा तनावग्रस्त हो जाते होंगे। यदि आप दिल का बोझ हल्का करना चाहती हैं तो अपने पति का दिल जीतें और मुस्कुराकर अपना काम करने के लिए विनती करें। फिर देखिए आपके मन से सही सहयोग देंगे।
घर में किसी बात को लेकर अधिक बेचैन न रहें और विवाद न बढ़ायें। बात को वहीं खत्म करें। बच्चे के रोने पर भी ज्यादा परेशान न हों। किसी भी काम को शांति से मिलजुलकर निपटायें। ऐसा भी नहीं कि दुकान में हों और घर की चिंता करें। इससे दिल का बोझ और बढ़ जायेगा और तनावग्रस्त हो जायेंगे।
ज्यादा बोझ वाले काम अधिक समय तक न करें। बीच-बीच में थोड़ा-थोड़ा विश्राम करें।
विपत्ति के समय धैर्य और मौन धारण कर हिम्मत से काम लें।
कभी किसी से झूठ भी न बोलें क्योंकि एक झूठ को छिपाने या सच साबित करने के लिए बार-बार झूठ बोलना पड़ता है। इसे निभाने में बड़ा मानसिक तनाव और दबाव सहना पड़ता है।
इस प्रकार आप उपरोक्त बातों को ध्यान में रखकर तनावग्रस्त होने से बच सकते हैं।
जनकराम साहू(स्वास्थ्य दर्पण)