

अगर आप 50 वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं और दीर्घायु होना चाहते हैं तो ज्यादा काम करना छोड़ ज्यादातर आराम फरमायें। यह मेरा कहना नहीं कि बल्कि जर्मनी के एक वैज्ञानिक पीटर एक्सट का कहना है।
दोपहर की नींद लेने वाले व्यक्तियों के अधिक समय तक जीवित रहने की संभावना रहती है।
लंबी उम्र संबंधी एक शोध के निष्कर्षों के आधार पर प्रो. एक्सट का कहना है कि लंबी दूरी तक दौड़ने वालों के बजाय घर में बैठकर आराम करने वाले और स्कवैश खेलने के बजाय दोपहर की नींद लेने वाले व्यक्तियों के अधिक समय तक जीवित रहने की संभावना रहती है। प्रो. पीटर एक्सट का यह भी कहना है कि खाली समय में धीरे- धीरे घूमना-फिरना और भूख से ज्यादा न खाना ही बेहतर स्वास्थ्य की निशानी है किन्तु बहुत जल्दी-जल्दी चलना सेहत के लिए दुःखदायी हो सकता है।
50 वर्ष की उम्र पार कर चुके व्यक्ति अन्य कार्यों के लिए आरक्षित ऊर्जा का उपयोग करके लंबी दूरी तक दौड़ लगाते हैं और यही वजह है कि उनकी याददाश्त इस उम्र में अक्सर कमजोर हो जाती है और वे समय से काफी पहले ही सठियाने लगते हैं जिसकी वजह से उनमें चिड़चिड़ापन, बड़बड़ापन जैसी तमाम गलत आदतों का जन्म होता है।
वैसे भी प्रौढ़ावस्था आने पर व्यक्तियों की कार्यक्षमता घटती जाती है, नतीजतन आराम करना ज्यादा फायदेमन्द होता है।
सिर्फ इतना ही नहीं, प्रो. प्रीटर ने सुबह जल्दी सोकर उठने को दिनभर की सुस्ती का प्रमुख कारण बताते हुए सूर्योदय के बाद तक सोने की सलाह भी दी है। वैसे भी प्रौढ़ावस्था आने पर व्यक्तियों की कार्यक्षमता घटती जाती है, नतीजतन आराम करना ज्यादा फायदेमन्द होता है। इसके लिहाज से उन्हें ज्यादा आराम करने की सलाह दी जाती है। कुल मिला कर इस नये शोध के आधार पर यह कहा जा सकता है कि यदि लंबी उम्र का जीवन व्यतीत करना है तो विशेषकर प्रौढ़ावस्था में काफी हद तक आराम फरमाना परम आवश्यक होता है।
- विनोद कुमार पाण्डेय(स्वास्थ्य दर्पण)