World Mental Health Day पर श्री श्री रविशंकर का आलेख
World Mental Health Day पर सीखें मन की शांति के उपाय

स्वस्थ मन ही स्वस्थ जीवन का आधार है

World Mental Health Day पर सीखें मन की शांति के उपाय
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गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर

विश्व ने ध्यान के महत्व को समझा और स्वीकार किया है। ध्यान वर्तमान युग की आवश्यकता है। ध्यान कोई विलासिता नहीं अपितु अनिवार्यता बन चुका है। ऐसे समय में, जब अकेलापन और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएँ लाखों लोगों को प्रभावित कर रही हैं, हमें कुछ ऐसा करने की आवश्यकता है, जो हमें स्वयं से जोड़ सके और भीतर जमा तनाव से मुक्त कर सके। यहीं ध्यान की भूमिका सामने आती है। आज मनुष्य जितने अनुभवों से गुजर रहा है, उन्हें उसकी इंद्रियाँ और मन संभाल नहीं पा रहे हैं। अनेक स्रोतों से लगातार उत्तेजनाएँ मिल रही हैं, लेकिन जीवन में कोई स्पष्ट दिशा नहीं है।

एक अनुभव आता है और पलक झपकते ही उसकी जगह कोई नया अनुभव ले लेता है। अनुभवों का यह सिलसिला कहीं समाप्त नहीं होता। यह सब मन की क्षमता से कहीं अधिक है। परिणामस्वरूप व्यक्ति भावनात्मक रूप से थक जाता है और भीतर से स्वयं को खोया हुआ महसूस करने लगता है। यदि उसे सही दिशा मिल जाए तो वह अधिक सृजनात्मक और शांत बन सकता है तथा अपने लक्ष्य प्राप्त कर सकता है। लेकिन यदि जीवन में दिशा और मूल्य न हों, तो समाज में एक ओर हिंसा और आक्रामकता में वृद्धि होती है और दूसरी ओर समाज अवसाद, निराशा और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों से जूझने लगता है।

मानसिक स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए हर दिन सुबह और शाम 15 से 20 मिनट ध्यान का अभ्यास करें। व्यस्त दिनचर्या के बावजूद आप दाँतों की स्वच्छता के लिए उन्हें नियमित रूप से साफ करते हैं। उसी प्रकार मानसिक स्वच्छता को भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। कुछ समय शांत बैठने और भीतर की शांति में डूबने के लिए निकालें, ताकि वही शांति आपके माध्यम से बाहर की दुनिया तक पहुँच सके। जिन लोगों ने नियमित रूप से ध्यान किया और आध्यात्मिक ज्ञान तथा शास्त्रों के अध्ययन के लिए समय दिया, तो वे मानसिक रूप से अधिक सशक्त, अंतर्बोध से संपन्न, स्पष्ट दृष्टि वाले, बौद्धिक रूप से अधिक सजग और भावनात्मक रूप से स्थिर हो गए।

अनिश्चितता के समय शरीर, मन और भावनात्मक स्वास्थ्य की देखभाल करना सबसे बुद्धिमत्तापूर्ण कदम है। कमजोर मन स्वस्थ शरीर को भी संभाल नहीं सकता, लेकिन स्वस्थ और मजबूत मन कमजोर शरीर को भी संभाल सकता है। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य का महत्व सर्वोपरि है। यदि मन स्वस्थ और सशक्त है, तो शारीरिक परेशानियों का सामना करना भी आसान हो जाता है। अधिकांश उपचार और पुनर्स्थापन की प्रक्रिया नींद के दौरान होती है और अच्छी नींद के लिए मानसिक स्वास्थ्य का सुदृढ़ होना आवश्यक है। मान लीजिए कोई व्यक्ति बीमार है और उसे सभी आवश्यक दवाएँ दी जा रही हैं, लेकिन उसे सोने नहीं दिया जाता। ऐसी स्थिति में दवाएँ भी अपना पूरा प्रभाव नहीं दिखा पाएँगी।

ध्यान कम समय में गहरा विश्राम प्रदान करता है। कई लोगों ने अनुभव किया है कि 20 मिनट के ध्यान के बाद वे स्वयं को आठ-दस घंटे की नींद के बाद की अपेक्षा अधिक ऊर्जावान महसूस करते हैं। ध्यान की शक्ति वास्तव में इतनी गहरी है। ध्यान हमारी ऊर्जा के स्तर और प्रतिरक्षा-तंत्र को सुदृढ़ करता है। यह मन को अधिक तीक्ष्ण बनाता है और हमारी जागरूकता बढ़ाता है। इससे हमारे भीतर सकारात्मकता बढ़ती है और हमारे साथ रहना दूसरों के लिए भी अधिक सुखद हो जाता है। सामूहिक ध्यान के भी अपने लाभ हैं। जब लोग एक साथ ध्यान करते हैं और अपने आंतरिक केंद्र की ओर अग्रसर होते हैं तो सकारात्मक ऊर्जा का एक वातावरण निर्मित होता है। सकारात्मक ऊर्जा का यह वातावरण मन को शांत और ऊर्जा को ऊधर्वगामी कर देता है। हिंसा-मुक्त समाज, रोग-मुक्त शरीर, भ्रम-मुक्त मन, संकोच-मुक्त बुद्धि, आघात-मुक्त स्मृति और शोक-मुक्त आत्मा, ये प्रत्येक मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार हैं। इन मानवीय लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में ध्यान एक प्रभावी साधन है।

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