Slim दिखने के लिए करते हैं हार्ड वर्क? कहीं उल्टा न पड़ जाए ये दांव

Slim दिखने के लिए करते हैं हार्ड वर्क? कहीं उल्टा न पड़ जाए ये दांव
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कोलकाता: आज स्लिम या दुबला होना सुन्दरता का पर्याय बन गया है। स्लिम होने के लिए आज युवक युवतियां सभी तरह के कष्ट सहने को तैयार हैं। वे स्लिम होने के लिए विभिन्न उपायों को आजमाते हैं पर आदर्श स्लिम शरीर शायद फोटोग्राफी और कम्प्यूटर की देन हैं। अत्यंत दुबले होने का शरीर पर कुप्रभाव पड़ता है। स्लिम होने के लिए युवक युवतियां बिना जाने समझे डायटिंग करती हैं पर डायटिंग यदि बिना पूरी जानकारी के की जाये तो शारीरिक और मानसिक बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं।अमेरिकन रिसर्च कौंसिल की नवीनतम शोधों से यह ज्ञात हुआ है कि बहुत दुबले व्यक्ति जल्दी थक जाते हैं। उनको संक्र मण रोग एवं पेट के रोगों की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। दुबले व्यक्ति अपने शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं रख पाते तथा अत्यन्त दुबले व्यक्ति की औसत आयु भी स्वस्थ व्यक्ति से कम होती है।दुबले व्यक्ति कौन कहलाते हैंजिस व्यक्ति का वजन अपनी उम्र एवं लम्बाई के मानक भार से 15 प्रतिशत से अधिक कम होता है या महिलाओं में शरीर के भार से 18 प्रतिशत कम तथा पुरुषों में 15 प्रतिशत से कम फैट पाया जाता है वे दुबले व्यक्ति कहलाते हैं। अत्यंत दुबले होने के अनेक कारण हैं।

आप भी हो सकते हैं कुपोषण का शिकार

अक्सर कुछ व्यक्ति चाहे कितना ही खायें, मोटे नहीं होते। प्राय: इनके माता-पिता भी दुबले होते हैं। भारत तथा अन्य विकासशील देशों में दुबले होने का सबसे प्रमुख कारण कुपोषण है। करोड़ों लोगों को पर्याप्त संतुलित भोजन उपलब्ध नहीं है। कुछ अन्य व्यक्ति अपनी आदतों या विचारों के कारण संतुलित आहार नहीं लेते और कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। बीमार व्यक्तियों में भी यदि भोजन पर समुचित ध्यान न दिया जाये तो वे कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। एनोरेक्सिया नरवोसाआज के आधुनिक युवक-युवतियों में स्लिम होने तथा स्लिम रहने की तमन्ना ने बिना समझे (डायटिंग) करना भी अत्यन्त दुबले होने का कारण बनता जा रहा है। स्लिम रहने के कारण आज का युवा वर्ग एनोरेक्सिया नरवोसा रोग का शिकार हो रहा है। ये बीमारियां अभी तक विकसित देशों जैसे अमेरिका, यूरोप में सामान्य थीं पर पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव के कारण देश में इन मर्जों के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है जिसके कारण रोगी को मानसिक, शारीरिक एवं सामाजिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

स्ल‌िम के चक्कर में ना रहें भूखे

एनोरेक्सिया नरवोसा का रोग अधिकतर युवतियों में पर कभी-कभी युवा लड़कों में भी हो सकता है। शुरुआत में स्लिम रहने के लिए अपनी इच्छा से भूखे रहते हैं पर फिगर बनाने की सनक में वह इस रोग के शिकार हो सकते हैं। रोगी का वजन उसके मानक भार से 20 से 40 प्रतिशत तक कम हो जाता है। उनके भोजन की मात्रा बहुत कम होती है तथा ये बहुत धीरे-धीरे खाते हैं पर उनकी कार्य करने की गति बढ़ जाती है। लक्षण इसके अतिरिक्त इनको चक्कर आना, कब्ज रहना, बाल झड़ना, नींद न आना, महिलाओं में मासिक धर्म बन्द हो जाने के लक्षण भी पाये जा सकते हैं। शरीर पीला और ठंडा होता है। डकार आने की शिकायत भी हो सकती है। इस रोग से ग्रस्त युवतियां अत्यंत दुबले होने पर भी अपने को मोटा समझती हैं तथा मोटे होने के डर से भयभीत रहती हैं। वे हमेशा यह सोचती हैं कि अन्य लोग कहीं उनको मोटा न समझें। हीन भावना से ग्रस्त रहती हैं। मानसिक संतुलन न रहने के कारण दोस्तों एवं रिश्तेदारों से दूर रहने लगती हैं।

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