

मधुर, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : महानगर में इन दिनों घर-घर बुखार, खांसी और बदन दर्द की शिकायतें बढ़ रही हैं। सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों की ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि इसके पीछे किसी नए वायरस का प्रकोप नहीं है, बल्कि मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के बीच पुराने और परिचित मौसमी वायरस का असर बढ़ गया है। हिचकी, छींक और खांसी से निकलने वाली बूंदों के जरिये ये वायरस तेजी से फैल रहे हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, किसी को तेज बुखार हो रहा है तो किसी को हल्का या लगातार बना रहने वाला बुखार। कई मरीजों में दो-तीन दिन में बुखार उतर जाता है, लेकिन खांसी और कमजोरी लंबे समय तक बनी रहती है। कई लोगों को खांसी से राहत मिलने में दो सप्ताह या उससे भी अधिक समय लग रहा है। कुछ मरीजों में बदन दर्द, गले में खराश, पेट की परेशानी और उल्टी जैसा महसूस होने की शिकायत भी सामने आ रही है।
अधिकतर मामलों में इन्फ्लुएंजा
संक्रामक रोग विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा संक्रमण मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को प्रभावित कर रहा है और इसके लक्षण फ्लू जैसे हैं। अस्पताल में भर्ती मरीजों की वायरल पैनल जांच में अधिकतर मामलों में इन्फ्लुएंजा की पुष्टि हो रही है। कुछ मरीजों में कोरोना वायरस की मौजूदगी भी मिली है। हालांकि ज्यादातर मरीजों का इलाज घर पर ही संभव हो रहा है। जिन मरीजों में ऑक्सीजन का स्तर कम हो रहा है या सांस लेने में परेशानी हो रही है, उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ रही है। पहले से किसी बीमारी से पीड़ित मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
गर्मी, बारिश और उमस ने बढ़ाई परेशानी
डॉक्टरों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में कभी तेज गर्मी तो कभी बारिश के कारण तापमान और नमी में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। इससे वायरस के फैलने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। वायरस विशेषज्ञ सिद्धार्थ जोआरदार के अनुसार, तापमान में अत्यधिक बदलाव और लगातार नम मौसम शरीर की सामान्य शारीरिक प्रक्रिया पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
बड़ों के बाद बच्चों में भी संक्रमण
इस संक्रमण की चपेट में सिर्फ बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि बच्चे भी बड़ी संख्या में आ रहे हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ के डॉक्टरों के अनुसार, कई मामलों में बच्चों का बुखार दवा देने के बावजूद आसानी से नियंत्रित नहीं हो रहा है। घर के किसी बड़े सदस्य के संक्रमित होने के बाद बच्चों में भी संक्रमण पहुंच रहा है। बच्चों में भी इन्फ्लुएंजा के मामले अधिक मिल रहे हैं, हालांकि कई मामलों में एक से अधिक वायरस के संक्रमण की आशंका भी सामने आ रही है।
चार-पांच दिन बाद भी बुखार रहे तो डेंगू की जांच जरूरी
डॉक्टरों ने बताया कि हर बुखार को केवल वायरल या फ्लू मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि चार-पांच दिन बीतने के बाद भी बुखार कम नहीं होता है, तो डेंगू की जांच कराना जरूरी है। फिलहाल ज्यादातर मरीजों में लक्षणों के आधार पर फ्लू का इलाज शुरू किया जा रहा है और अधिकांश मामलों में इससे राहत भी मिल रही है। बुखार और खांसी के दौरान बिना सलाह के दवाइयां या स्टेरॉयड लेना उचित नहीं है। उपचार चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए।