

कोलकाता : सर्दी का मौसम जहां एक ओर ठिठुरन और सुस्ती लाता है, वहीं दूसरी ओर यह जोड़ों के दर्द और ऑटोइम्यून बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए गंभीर समस्याएं भी बढ़ा देता है। हर साल हजारों मरीज ठंड के दिनों में दर्द, अकड़न और चलने-फिरने में परेशानी की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर जागरूकता और सही देखभाल से सर्दियों में होने वाली इस पीड़ा को काफी हद तक रोका जा सकता है। एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी एंड रूमेटोलॉजी के कंसल्टेंट रूमेटोलॉजिस्ट डॉ. अर्घ्य चट्टोपाध्याय के अनुसार, सर्दियों का मौसम जोड़ों, मांसपेशियों और ऑटोइम्यून बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। जो दर्द गर्मियों में हल्का रहता है, वह ठंड में गंभीर रूप ले सकता है। ठंड के कारण ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाती हैं, जिससे जोड़ों और मांसपेशियों में रक्त संचार कम हो जाता है। इससे अकड़न, दर्द और उंगलियों और पैरों में सुन्नता बढ़ सकती है। रूमेटॉइड आर्थराइटिस, ऑस्टियोआर्थराइटिस, स्पॉन्डायलोआर्थराइटिस, ल्यूपस, रेयनॉड्स फिनोमेनन और फाइब्रोमायल्जिया जैसी बीमारियों में सर्दियों के दौरान लक्षण अधिक बढ़ते हैं।
वायरल संक्रमण भी इन रोगों में फ्लेयर का कारण बन सकते हैं। डॉ. चट्टोपाध्याय ने बताया कि सर्दियों का दर्द उम्र का हिस्सा नहीं है। लगातार दर्द होने पर जांच जरूरी है। विटामिन डी और पर्याप्त प्रोटीन भी जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, जोड़ों में सूजन, लंबे समय तक सुबह की अकड़न, उंगलियों का रंग बदलना, बुखार, वजन कम होना या अचानक चलने-फिरने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। बुजुर्ग, ऑटोइम्यून रोगी, डायबिटीज के मरीज और स्टेरॉयड या इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं लेने वालों को सर्दियों में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।