

स्वस्थ तो सभी रहना चाहते हैं, पौष्टिक आहार का सेवन भी करते हैं पर जब बात व्यायाम की आती है तो उनके पास एक ही जवाब होता है समय ही नहीं मिलता, व्यायाम कैसे करें। माना कि जिंदगी अब भागदौड़ वाली हो गई है। फिर भी हम जरूरी काम के लिए समय निकालते हैं। इसी प्रकार इसे भी जरूरत का अंग मान लें तो हम समय निकाल पाएंगे।
व्यस्त जीवन शैली में हम सब जिम जाकर व्यायाम तो कर नहीं सकते। अगर कुछ आसान व्यायाम घर पर समय निकाल कर कर लें तो हम स्वस्थ भी रहेंगे और प्रसन्नचित्त भी। कुछ सूक्ष्म क्रियाएं, स्ट्रेचिंग, वार्मअप, एक्सरसाइज नियमित रूप से की जाएं तो शरीर चुस्त बना रहेगा और मांसपेशियां ओर जोड़ एक्टिव बने रहेंगे।
स्वस्थ तो सभी रहना चाहते हैं, पौष्टिक आहार का सेवन भी करते हैं पर जब बात व्यायाम की आती है तो उनके पास एक ही जवाब होता है समय ही नहीं मिलता, व्यायाम कैसे करें। माना कि जिंदगी अब भागदौड़ वाली हो गई है। फिर भी हम जरूरी काम के लिए समय निकालते हैं। इसी प्रकार इसे भी जरूरत का अंग मान लें तो हम समय निकाल पाएंगे।
व्यस्त जीवन शैली में हम सब जिम जाकर व्यायाम तो कर नहीं सकते। अगर कुछ आसान व्यायाम घर पर समय निकाल कर कर लें तो हम स्वस्थ भी रहेंगे और प्रसन्नचित भी। कुछ सूक्ष्म क्रियाएं, स्ट्रेचिंग, वार्मअप, एक्सरसाइज नियमित रूप से की जाएं तो शरीर चुस्त बना रहेगा और मांसपेशियां ओर जोड़ एक्टिव बने रहेंगे।
हमारे सारे शरीर का भार पैर और टांगें उठाती हैं। अगर पैर, घुटने स्वस्थ रहेंगे तो हमें सीढ़ी चढ़ने में आलस्य नहीं आएगा और चलने फिरने में भी हमारी चुस्ती बरकरार रहेगी। हाथों को घुटनों पर रखकर दस बार एंटीक्लाॅकवाइज घुमाएं। जल्दी जल्दी न करें। धीरे धीरे बड़े से बड़े दायरे बनाएं।
कुर्सी पर बैठकर पहले दाईं टांग को ऊपर उठाएं, रुकें,
फिर धीरे से वापस लाएं।
इसी प्रकार बांई टांग को ऊपर उठाएं, रुकें,
फिर धीमे से वापस लाएं।
पंजे खिंचे हुए रखें।
10 से 15 बार क्षमतानुसार करें।
फिर दोनों टांगों को एक साथ उठाएं, रुकें, वापस लाएं।
पंजे खिंचे रहने से पैरों की नस नाड़ियां खुलती हैं।
टांगों को ऊपर ले जाने और वापस लाने से टांगों की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं और रक्त प्रवाह ठीक बना रहता है।
सीधे खड़े होकर पंजों के बल आ जाएं, एड़ियां उठा लें।
कमर, गर्दन सीधी रखें।
जब थक जाएं, एड़ियों को जमीन पर लाएं।
इस प्रकार 10 से 15 बार एड़ियों को उठाएं, पंजों के बल खड़े रहें।
पंजों को कुर्सी पर बैठकर आगे पीछे तानें, गोल गोल घुमाएं। फिर उलटी दिशा में घुमाएं। ध्यान रखें पंजे तने हुए रहें।
इस प्रकार हम पंजों और एड़ियों की मांसपेशियों को मजबूत रख सकते हैं जिनके सहारे हम दिन भर चलते हैं।
दोनों हाथ सामने की ओर लाएं।
कंधों के लेवल तक बाजू खिंचे हुए हों। मुट्ठी बनाएं।
कलाइयों से गोल गोल घुमाएं, 10-15 बार घुमाएं।
फिर 10 -15 बार उलटी दिशा में।
अब हाथों को ऊपर ले जाएं,
फिर नीचे 10 से 15 बार।
उंगलियों को पूरी तरह स्ट्रेच कर पंजे को खोलें
जितना मोड़ सकती है, पंजे को मोड़ें ।
10 से 15 बार इस क्रिया को करें।
इससे बाजुओं, हथेलियों और उंगलियों का रक्त संचार बढ़ेगा।
सीधे बैठ कर कमर, गर्दन सीधी रखें।
आंखों से कुछ दूरी पर बिंदु बनाएं।
बिना पलके' झपकाएं उस ओर देखें।
जब आंखें थकने लगे तो बंद कर लें।
4 से 5 बार करने के बाद दाई' ओर बिना गर्दन घुमाए आंखों की बाल्स को ऊपर से ऊपर देखें, फिर नीचे से नीचे देखें।
थकने पर आराम करें।
4 से 5 बार दाई' ओर, फिर उतनी बार बाई ओर देखें ।
आंखों को गोल गोल घुमाएं ऊपर, दाएं, नीचे, बाएं।
गर्दन नहीं घुमानी, बस आईबाल्स को घुमाएं,
इसी प्रकार ऊपर बाएं, नीचे दाएं। 4 से 5 बार करें।
जब भी थकान लगे आंखें बंद कर लें।
आंखों को पूरा खोलें, जीभ निकालें।
ऐसा करने से मांसपेशियों का रक्त संचार बढ़ेगा।
फिर वापिस नार्मल स्थिति में। तीन से चार बार
करें। दोनों हथेलियों को रगड़कर आंखों पर लगाएं। राहत मिलेगी।
इसी प्रकार गर्दन को दाएं कंधे पर रखें, कंधा न उठाएं।
जहां तक आसानी से गर्दन जाए, ले जाएं।
3 से 4 बार करने के बाद बांईं ओर से करें।
गर्दन को दांईं ओर ले जाएं।
अपनी ठुड्डी को कंधे की सीध तक ले जाने का प्रयास करें।
इसी प्रकार बाईं ओर से करें।
गर्दन को क्लाक वाइज, एंटी क्लाक वाइज धीरे धीरे घुमाएं।
बीच में गर्दन को लाकर विश्राम करें।
हाथों की मुट्ठियां बनाकर कंधों पर रखें। अब दोनों
कंधों को दाईं ओर ले जाएं पर चेहरे को न घुमाएं चेहरा सीधा रखें,
फिर दोनों कंधे बांईं ओर, चेहरा सीधा।
चेहरा और दोनों कंधे सीधी लाइन में रहें। 4 से 5 बार करें।
दोनों हाथ सामने लाएं।
हथेलियों का रुख आमने सामने, हाथ खिंचे हुए, बाजू तनी हुई।
दोनों हाथों में कंधों जितना फासला।
अब दोनों हाथ एक साथ दांईं ओर, पैर जमे हुए।
बस कमर से ऊपर का भाग घूमेगा।
गर्दन भी साथ घूमेगी इसी प्रकार बाई ओर धीरे धीरे 4 से 5 बार करें।
फिर हाथों को ढीला कर थोड़ा तेजी से 8 से 10 बार करें।
इस प्रकार छोटे छोटे व्यायाम के लिए आधा घंटा अपने लिए जरूर निकालें।
इसे अनिवार्यता दें ताकि शरीर आपका साथ अधिक समय तक दे सके। आप चुस्त-दुरुस्त बनें रहें और जोड़ों के दर्दों से दूर रह सकें। नीतू गुप्ता(स्वास्थ्य दर्पण)