मधुर, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : वर्ल्ड हार्ट डे के अवसर पर युवाओं में बढ़ते हृदय रोग और हार्ट अटैक के खतरे को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। बीएम बिड़ला हार्ट हॉस्पिटल के डायरेक्टर ऑफ कार्डियोलॉजी डॉ. अंजन सियोतिया ने कहा कि भारत में कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का वास्तविक बोझ उपलब्ध आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकता है। बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कम उम्र में भी हृदय संबंधी समस्याएं देखने को मिल रही हैं।
तनाव और नींद की कमी बढ़ा रही परेशानी
डॉ. सियोतिया के अनुसार, युवाओं में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों के पीछे पारंपरिक जोखिम कारकों के साथ जीवनशैली से जुड़े कई अन्य कारण भी हैं। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और मोटापे के अलावा शारीरिक गतिविधियों की कमी चिंता का विषय है। स्कूल, कॉलेज और करियर से जुड़ा लगातार तनाव, सोशल मीडिया और मोबाइल फोन का अत्यधिक इस्तेमाल तथा नींद पूरी नहीं होना भी हृदय स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। उन्होंने युवाओं में हार्ड ड्रग्स के बढ़ते इस्तेमाल को भी गंभीर जोखिम बताया। सीने में भारीपन, जकड़न या असहजता को केवल गैस की समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हार्ट अटैक में सीने के बीचों-बीच दर्द या दबाव महसूस हो सकता है। यह दर्द बाएं या दाएं हाथ, जबड़े, गले, पीठ या पेट के ऊपरी हिस्से तक फैल सकता है।
स्मार्टवॉच से ज्यादा जरूरी है स्वस्थ जीवनशैली
डॉ. सियोतिया ने कहा कि स्मार्टवॉच या फिटनेस ट्रैकर स्वास्थ्य पर नजर रखने में मदद कर सकते हैं, लेकिन केवल इन्हें पहनने से हार्ट अटैक का खतरा कम नहीं होता। कुछ मामलों में इन उपकरणों की रीडिंग को लेकर अनावश्यक चिंता भी बढ़ सकती है। दिल को स्वस्थ रखने के लिए धूम्रपान छोड़ना, वजन नियंत्रित रखना, संतुलित आहार लेना, नियमित वॉक या व्यायाम करना, पर्याप्त नींद लेना और तनाव को नियंत्रित करना जरूरी है। विशेषज्ञ के मुताबिक, कम उम्र से ही इन आदतों को जीवनशैली का हिस्सा बनाना हृदय रोगों के जोखिम को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

