

पपीते के गुणों से सभी वाकिफ हैं। इसका प्रयोग औषधि के रूप में भी किया जाता है, सुन्दरता के लिए भी और पौष्टिकता के लिए भी। कब्ज के लिए तो इसे रामबाण माना जाता है।
पपीता नेचुरल मीठा फल है और इसकी मिठास आसानी से शरीर में रम जाती है। पपीते में 90 प्रतिशत पानी और 7.2 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट होता है। पपीते में एक और गुण यह है कि दूसरे भोज्य पदार्थों को भी आसानी से पचा देता है। पपीता आंतों में वांछित विटामिनों की जरूरत भी पूरा करता है। सामान्य फल होने के बावजूद भी यह गुणों से भरपूर है।
पपीते का दूध दाद पर लगाने से लाभ मिलता हैै।
बढ़ने वाले बच्चे यदि नियमित पपीते का सेवन करें तो उनके शरीर का विकास अच्छा होता है।
गैस, आंव, कब्ज और बार-बार शौच जाने की बीमारी में रामबाण का काम करता है।
पपीता मोटापा कम करता है और पेट का अफारा दूर करता है।
पके पपीते के गूदे को दूध के साथ मसल कर चेहरे पर लगाने से चेहरे में चमक आती है।
पपीते के नियमित सेवन से आंतों की कमजोरी को दूर किया जा सकता है।
कच्चे पपीते को उबालकर खाने से पुराने दस्त दूर होते हैं।
पपीते को नियमित रूप से खाली पेट खाने से सौंदर्य निखरता है। त्वचा पर कांति आती है।
कच्चे पपीते की सब्जी व रायता खाने से आंतों संबंधी रोग, अजीर्णता और पेट के कीड़े नष्ट होते हैं।
पपीते के हलुवे से वजन में वृद्धि होती है। कम वजन वालों को पपीते के हलुवे का नियमित सेवन करना चाहिए।
पेट के रोगी को खाली पेट पका पपीता प्रतिदिन खाना चाहिए।
रक्त की कमी को भी दूर करता है पपीते का नियमित सेवन।
पपीते के लगातार सेवन करने से अस्थिक्षय की वृद्धि रुक जाती है। घुटनों की व टखनों की सूजन कम होती है।
सारिका(स्वास्थ्य दर्पण)