न चीरा, न टांके, न खून! कोलकाता में शुरू हुई गामा नाइफ तकनीक

एक दिन में इलाज, ब्रेन ट्यूमर से ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया तक सर्जरी संभव
फाइल फोटो
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मधुर, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : बिना चीरा लगाए और बिना रक्तस्राव के मस्तिष्क के चुनिंदा रोगों के इलाज की आधुनिक तकनीक गामा नाइफ रेडियोसर्जरी अब कोलकाता में भी उपलब्ध होगी। इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज कोलकाता में इस तकनीक की शुरुआत की गई है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, पिछले सप्ताह कश्मीर के एक मरीज का सफल इलाज कर इस सेवा की शुरुआत हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, गामा नाइफ वास्तव में बेहद सटीक स्टिरियोटैक्टिक रेडियोसर्जरी तकनीक है। नाम में ‘सर्जरी’ शब्द होने के बावजूद इसमें पारंपरिक ऑपरेशन की तरह चीरा या रक्तस्राव नहीं होता। इसमें मस्तिष्क के किसी खास ट्यूमर या क्षतिग्रस्त हिस्से को लक्ष्य बनाकर अत्यंत केंद्रित गामा रेडिएशन दिया जाता है। इसका उद्देश्य आसपास के स्वस्थ मस्तिष्क के टिश्यू पर रेडिएशन का प्रभाव कम से कम रखना है।

एक दिन में इलाज की सुविधा

उपयुक्त मरीजों में गामा नाइफ उपचार कई मामलों में डे-केयर प्रक्रिया के रूप में किया जा सकता है। यानी मरीज को लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की जरूरत नहीं पड़ती और उपचार के बाद उसी दिन घर लौटने की संभावना रहती है।

किन रोगों में हो सकता है इस्तेमाल?

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, ब्रेन ट्यूमर के अलावा गामा नाइफ का इस्तेमाल कुछ चुनिंदा मामलों में, मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं की असामान्यताओं, ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया और कुछ विशेष न्यूरोलॉजिकल रोगों के इलाज में किया जा सकता है। खास तौर पर मस्तिष्क के ऐसे महत्वपूर्ण हिस्सों के पास मौजूद रोग या घाव, जहां पारंपरिक सर्जरी जोखिमपूर्ण हो सकती है, वहां इस तकनीक की उपयोगिता अधिक हो सकती है।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मौजूदगी में पहला इलाज

पहले मरीज के उपचार में न्यूरोसर्जन राजेश भोंसले के साथ अमेरिका के रॉसवेल पार्क कॉम्प्रिहेंसिव कैंसर सेंटर के गामा नाइफ रेडियोसर्जरी विशेषज्ञ धीरेन्द्र प्रसाद और प्राग के मेडिकल फिजिसिस्ट जोसेफ नोवोटनी भी शामिल रहे। आईएनके के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर और न्यूरोसर्जन डॉ. आर.पी. सेनगुप्ता ने कहा कि बिना चीरा लगाए डे-केयर आधार पर मस्तिष्क के विभिन्न रोगों के इलाज का विकल्प कोलकाता के लिए महत्वपूर्ण है। वहीं, अस्पताल के वाइस चेयरमैन एवं न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. ऋषिकेश कुमार ने कहा कि, उपयुक्त मरीजों में पारंपरिक ओपन-ब्रेन सर्जरी के विकल्प के तौर पर यह तकनीक कम समय में अत्यधिक सटीक उपचार का रास्ता खोल सकती है। हालांकि, गामा नाइफ हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं होता। उपचार का फैसला रोग, उसके आकार और स्थान तथा मरीज की पूरी चिकित्सकीय स्थिति का आकलन करने के बाद विशेषज्ञ करते हैं।

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