

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : रचनात्मकता, जुड़ाव और भाई-बहन के रिश्ते की भावना उस समय एक साथ देखने को मिली, जब इंडिया ऑटिज्म सेंटर ने ‘अपनत्व के धागे’ नामक एक समावेशी राखी-निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया। ऑटिज्म और संबंधित विकासात्मक स्थितियों से जुड़े व्यक्तियों के सहयोग के लिए समर्पित एक प्रमुख गैर-लाभकारी संगठन, इंडिया ऑटिज्म सेंटर द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में न्यूरोडाइवर्जेंट व्यक्तियों, उनके भाई-बहनों और दोस्तों ने एक साथ भाग लिया। रक्षाबंधन के अवसर पर कला-चिकित्सा आधारित इस आयोजन ने प्रतिभागियों को रचनात्मक रूप से स्वयं को अभिव्यक्त करने, आत्मविश्वास विकसित करने और साझा अनुभवों के माध्यम से साथियों एवं भाई-बहनों के बीच रिश्तों को मजबूत करने के लिए एक आत्मीय वातावरण प्रदान किया।
इस सत्र का संचालन राजश्री मुखर्जी और अनामित्रो चटर्जी ने किया। इस गतिविधि ने प्रतिभागियों को आत्म-अभिव्यक्ति और भावनात्मक जुड़ाव के माध्यम के रूप में रचनात्मकता को तलाशने का अवसर दिया। वहीं, एक साझा संवाद सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपनी बनाई गई राखियों के पीछे की भावनाओं और विचारों को साझा किया। सत्र का समापन प्रतिभागियों द्वारा एक-दूसरे को अपने हाथ से बनाई गई राखियाँ बाँटने के साथ हुआ, जिसने भाई-बहन के रिश्ते के इस उत्सव को एक व्यक्तिगत और सार्थक स्पर्श दिया।
पहल के बारे में बात करते हुए इंडिया ऑटिज्म सेंटर के निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जयशंकर नटराजन ने कहा कि आईएसी में हमारा मानना है कि समावेशन तब साकार होता है, जब व्यक्तियों को भाग लेने, स्वयं को अभिव्यक्त करने और सार्थक संबंध बनाने के लिए स्थान और अवसर दिया जाता है।