

यूं तो दिल शरीर में आकार के आधार पर छोटा सा अंग ही तो है पर अगर दिल का धड़कना बंद हो जाए तो बड़े से बड़ा शरीर बेकार हो जाता है। कितना महत्त्वपूर्ण है यह मुट्ठी के आकार वाला दिल। इस महत्त्वपूर्ण अंग को सक्रि य बनाए रखने के लिए हमें कुछ तो करना ही चाहिए ताकि यह अधिक से अधिक समय तक हमारे शरीर में स्वस्थ रहते हुए धड़कता रहे।
सीमित करें नमक का सेवन
नमक के अधिक सेवन से रक्तचाप बढ़ता है । रक्तचाप के बढ़ने से हृदय और गुर्दे के रोग होने का खतरा बढ़ जाता है। एक सामान्य व्यक्ति को दिन भर में अधिकतम 5 ग्राम नमक का सेवन करना चाहिए। भारतीय 16 से 17 ग्राम नियमित सेवन करते हैं जो सामान्य रूप से तीन गुणा अधिक हैं अत: हमें अपने नियमित खाने में नमक की मात्रा संयमित करनी चाहिए।
भोजन के साथ चटनी, पापड़ व अचार के सेवन से बचना चाहिए। अगर इन खाद्य पदार्थों को खाने का मन भी करे तो कभी कभार हमें सब्जी या दाल न लेकर थोड़ा सा इनका सेवन कर लेना चाहिए। चाय के साथ नमकीन का सेवन भी नहीं करना चाहिए।
रखें रक्तचाप एवं कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण
बढ़ा हुआ रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल दोनों ही हृदय के बड़े शत्रु हैं। जहां रक्तचाप लगातार बढ़ा तो हृदय, किडनी आदि रोग घेर लेते हैं और कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने से हृदयाघात व पक्षाघात होने का खतरा बढ़ जाता है। कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से हमारी रक्तवाहिनियों में वसा एकत्रित होने लगती है और रक्तवाहिनियां संकुचित हो जाती हैं जिससे ब्लड सर्कुलेशन हृदय तक ठीक से नहीं पहुंच पाता और दिल का दौरा पड़ने की संभावना बढ़ जाती है।
इसके लिए हमें शारीरिक श्रम करने के साथ आहार में रेशे वाली चीजें खानी चाहिए। दालें, मेवे, हरा साग और फल की मात्रा नियमित आहार में बढ़ा सकते हैं। अपने रक्तचाप और कोलेस्ट्रोल की जांच नियमित करवाते रहें। थोड़ा सा भी स्तर में बदलाव आए तो अपने चिकित्सक को रिपोर्ट दिखा कर सलाह लें।
अपनी स्वास्थ्य संबंधी कमियों को जानें
कुछ ऐसे रोग हैं जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलते हैं जैसे मधुमेह, दिल का दौरा, कैंसर, उच्च रक्तचाप आदि। अगर आपके परिवार का कोई भी सदस्य इन बीमारियों में से किसी से भी ग्रस्त है तो आपको बहुत जल्दी सावधानी बरतनी प्रारंभ कर देनी चाहिए। रक्तचाप, खून में शुगर की जांच कोलेस्ट्रॉल की जांच हर निश्चित समय पर करवाते रहें। शरीर में और कोई भी समस्या महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें।
वजन को रखें नियंत्रण में
मोटापा कई रोगों को निमंत्रण देता है। यह उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, कैंसर आदि की संभावना को बढ़ाता है। 30 वर्ष की आयु के बाद अपने खान पान और जीवनशैली में बदलाव लाएं। तला हुआ भोजन, अधिक नमक, अधिक मीठे खाद्य पदार्थ, मलाईयुक्त दूध और उसी दुग्ध से बने उत्पादों का सेवन बहुत कम कर दें । शारीरिक श्रम बढ़ाएं और व्यायाम और घर के छोटे-छोटे काम स्वयं करें ताकि शरीर चुस्त बना रहे। आरामपरस्त जीवन की आदत से छुटकारा पाएं।
अल्कोहल और धूम्रपान पर रखें नियंत्रण
अगर आप स्वस्थ रहना चाहते हैं तो अल्कोहल और धूम्रपान का त्याग करें दें जो सबसे उचित है। अगर त्याग नहीं कर सकते तो बहुत संयमित मात्र में इनका सेवन करें । जो लोग धूम्रपान काफी करते हैं, उन्हें दिल की बीमारी का खतरा धूम्रपान न करने वालों के मुकाबले में दो गुना अधिक होता है ।
इसी प्रकार अधिक अल्कोहल लेने वालों की हृदय की मांसपेशियां फैल जाती हैं और रक्तचाप बढ़ जाता है जिससे दिल का दौरा पड़ने की संभावना अधिक हो जाती है। अपने हृदय को बचा कर रखने में ही समझदारी है। आज से ही प्रण लें कि आप असमय हृदय रोगी नहीं बनना चाहते।
तनाव से बचाकर रखें स्वयं को
अपनी मानसिक अवस्था को शांत रखें। चिंता चिता समान है। इससे दूरी ही बेहतर है। जीवन में उतार-चढ़ाव दु:ख तकलीफें आती रहती हैं। प्रयास कर इन्हें जीवन का हिस्सा मानें और धैर्य से काम लें। गुस्से पर काबू रखें। गुस्सा उच्च रक्तचाप के लिए बहुत ही खतरनाक है। गुस्सा आने की स्थिति में उस परिस्थिति से दूर रहने का प्रयास करें और मन और दिमाग को अन्यत्र लगाने का प्रयास करें।
स्वयं को रखें क्रियाशील
आलस्य शरीर का सबसे बड़ा शत्रु है। अगर हम आलसी बने रहेंगे तो हृदय भी आलसी बन जाएगा। हृदय को हमेशा क्रियाशील बनाए रखने के लिए शारीरिक श्रम करना आवश्यक होता है ताकि हृदय शरीर के विभिन्न अंगों को रक्त आसानी से पंप कर सके। प्रतिदिन 30 मिनट का व्यायाम अवश्य करें या टहलें। टहलना हृदय के लिए बहुत ही उत्तम है। शोधकर्ताओं के अनुसार 1 मिनट टहलने से 1.50 मिनट की आयु में वृद्धि होती है।
हार्ट अटैक के लक्षण पहचानें
छाती के मध्य भाग में जकड़न व दर्द, गर्दन, जबड़ों और बाहों में जा सकता है। यह दर्द एंजाइना की स्थिति को भी दर्शाता है। ऐसे में इस दर्द की नजरअंदाजी दिल के गंभीर दौरे का कारण बन सकती है जो जीवन के लिए घातक सिद्ध हो सकती है।
कई बार अधिक मेहनत करने से भी गर्दन छाती और बाहों में दर्द हो सकता है। आप को स्वयं को पता होता है कि आज अपने अपनी क्षमता से अधिक श्रम किया है। ऐसे में आराम करें। फिर भी दर्द में फर्क न पड़े तो शीघ्र डॉक्टर से सम्पर्क करें। नीतू गुप्ता (स्वास्थ्य दर्पण)