आधुनिक जीवन की देन है-थकान

Health
थकान
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आधुनिक युग में व्यक्ति के मन में कई इच्छायें हैं किंतु इन इच्छाओं को पूरा करने के साधन बहुत सीमित हैं। ऐसे में जल्दी-जल्दी सब कुछ पाने की चाह व्यक्ति को थका डालती है। आज हर कोई थका हुआ नजर आता है। मजदूर को शारीरिक थकान है, विद्यार्थी मानसिक रूप से थके हुए हैं। घरेलू महिलाएं घर के कामों से थकान महसूस कर रही हैं तो कामकाजी महिलाएं दोहरी जिम्मेदारियों को निभाते हुए थकान महसूस कर रही हैं।

सामान्य रूप से कठोर शारीरिक और मानसिक परिश्रम करने वाले लोग अपने तन-मन में एक प्रकार की शिथिलता का अनुभव करते हैं, यही अनुभूति थकान है जो नैसर्गिक है किंतु अकारण होने वाली थकान एक बीमारी है।

जहां सामान्य थकान एक सहज प्राकृतिक प्रक्रिया है वहीं असामान्य थकान एक प्रकार की बीमारी है। इसका असर शारीरिक व मानसिक दोनों स्तरों पर होता है। हमेशा चिंता में डूबे रहना, अनिद्रा, तनाव, उत्साह का अभाव, चिड़चिड़ापन, निराशा, ध्यान न लगना तथा शारीरिक शक्ति का क्षीण होना असामान्य थकान के लक्षण हैं।

चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में हुए अध्ययनों से यह ज्ञात हुआ है कि स्नायुतंत्र तथा मांस-पेशियों में लैक्टिक अम्ल उत्पन्न होने के कारण शारीरिक सामर्थ्य कम हो जाती है जिससे आदमी थकान का शिकार हो जाता है। इसके अतिरिक्त पाचन तंत्र में गड़बड़ी, मधुमेह, कुपोषण, नशीले पदार्थों का सेवन, रक्त में शर्करा की कमी आदि भी थकान उत्पन्न करने के कारण हैं।

  • थकान के मानसिक कारणों में हताशा, चिंता, नीरसता, तनाव, असफलता आदि हैं। आज के तेज गति से चलने वाले जमाने में जो व्यक्ति जीवन की कठिन परिस्थितियों से समायोजन नहीं कर पाता है, वह आखिर में थकान का शिकार हो जाता है। थकान का सबसे आसान उपाय है आराम। आराम से शरीर व मन हल्का हो जाता है तथा थके हुए शरीर व मन को कार्य करने की शक्ति पुनः प्राप्त हो जाती है।

  • दिनचर्या में थोड़ा बहुत परिवर्तन करने से व्यक्ति कार्य की एकरूपता से निजात पा जाता है और पुनः ताजगी महसूस करता है।

  • थकान के रोगी को पौष्टिक भोजन लेना चाहिए तथा नियमित रूप से हल्का-फुल्का व्यायाम व योग करना चाहिए। इससे मन प्रसन्न रहता है व शरीर हर समय तरोताजा रहता है।

  • पर्याप्त नींद और स्वस्थ वातावरण प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है। थकान से ग्रस्त व्यक्ति को अच्छे वातावरण में रहना चाहिए तथा पर्याप्त नींद लेनी चाहिए।

वर्तमान में प्रायः प्रत्येक व्यक्ति पारिवारिक व सामाजिक समस्याओं से घिरा है। इनके कारण व्यक्ति मानसिक संघर्ष और तनाव का शिकार हो जाता है। यदि मनोचिकित्सक की सलाह से ये समस्यायें शीघ्र ही सुलझा ली जायें, तो व्यक्ति थकान से बच सकता है।

विक्रम भण्डारी(स्वा)

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