

बहुत से लोगों को कुत्ता, खरगोश, कबूतर, तोता, मैना, विलायती चूहे आदि पालने का शौक होता है। किसी को प्यार से पालना अपने-आप में एक अद्भुत अनुभव होता है परन्तु थोड़ी-सी असावधानी से पशु-पक्षियों के रोग से संक्रमित हुआ जा सकता है ।
पालतू पशु-पक्षियों द्वारा एक-दर्जन ऐसे रोग हैं जिनसे मनुष्य संक्रमित हो सकते हैं। ’रैबीज‘ व ’प्लेग‘ के समान ही अनेक ऐसी बीमारियां होती हैं जो पालतू पशु-पक्षियों द्वारा फैल जाती हैं किन्तु जानकारी न होने के कारण हम उन बीमारियों से अपना बचाव नहीं कर पाते। पालतू जानवरों द्वारा संप्रेषित अधिकांश रोग भयानक और घातक नहीं होते। अगर आपको इनकी जानकारी हो जाये तो इनसे बचाव और उपचार संभव हो सकता है।
बिल्ली की खरोंच से रोगाणुजनित संक्रमण होने का खतरा बन जाता है। कभी-कभी बिल्ली के चाटने या काट लेने से भी संक्रमण हो जाता है। लसिका ग्रंथि की कोमलता तथा सूजन, खरोंच के स्थान पर लाल सूजन, ज्वर आदि के लक्षण होते ही तुरंत सजग होना चाहिए। ये लक्षण दो से छह माह तक दिखाई दे सकते हैं। ये स्वयं भी ठीक हो सकते हैं किन्तु चिकित्सक से सम्पर्क करके निदान अवश्य करा लेना चाहिए ।
कुत्ते एवं बिल्लियों को कृमि हो जाया करते हैं। जिस मिट्टी में कुत्ते के मल के अंश होते हैं, मनुष्य उसके सम्पर्क में आते ही संक्रमित हो जाता है। अंकुश कृमि (हुकवर्म) ऐसा परजीवी होता है, जो अक्सर कुत्तों में पाया जाता है। यह कृमि मनुष्य की त्वचा में प्रवेश कर अत्यधिक खुजली वाले दाने उत्पन्न करते हैं। कभी तो यह बीमारी सप्ताह भर में ही ठीक हो जाती है तो कभी-कभी लम्बे उपचार के बाद ही ठीक हो पाती है ।
कुत्ते एवं बिल्ली के बालों से दाद नामक बीमारी भी हो जाती है। इनके बालों में छिपे फफूंद संक्रमण के जिम्मेवार होते हैं। मनुष्य में जब इन पशुओं का दाद संक्रमित होता है, तो अत्यन्त ही कष्टदायक, स्थिति उत्पन्न हो जाती है। कभी-कभी इन पालतू जन्तुओं के रोगों से नजला-जुकाम आदि भी हो जाया करता है।
पालतू जानवरों कुत्ता, बिल्ली, बन्दर आदि के काटने से भी प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में लोग आहत होते हैं। इनके नाखूनों से तो लोग घायल होते ही हैं, साथ ही एक हल्का सा दांत भी ’पास्तरैला मल्टीकोडा‘ नामक जीवाणु को संप्रेषित करता है। कुत्ते या बिल्ली के काटने पर यह रोगाणु स्थानांतरित हो जाता है। काटने वाले स्थान पर सूजन, ज्वर आदि इसके संक्रमण के लक्षण होते हैं।
पालतू जानवर के काटते ही रैबीज के टीके अवश्य लगवा लेना चाहिए।
पशु-पक्षियों को छूने के बाद हाथों को हमेशा साबुन से साफ कर लेना चाहिए। इनके मुंह पर चूमना ठीक नहीं होता। पशु-पक्षियों को अपनी थाली में खाने न दें।
उनके खाने- पीने के बर्तनों को अलग रखना चाहिए। इनकी सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए।
घर के अन्दर मल-मूत्र का त्याग न करें, इसका ध्यान अवश्य रखना चाहिए।
पक्षियों के पिंजरों की सफाई करते समय हाथ में रबर के दस्तानों को पहन लेना चाहिए। बाद में अच्छी तरह साबुन से हाथ साफ कर लेना चाहिए।
पशु-पक्षियों को अपने बेडरूम, किचन आदि में भूलकर भी नहीं ले जाना या रखना चाहिए।
उपरोक्त बातों का ध्यान रखकर ही पशु-पक्षियों को पालना चाहिए। जीव-प्रेम करना अच्छी बात है किन्तु अपनी सेहत खराब न हो, इसका भी ध्यान रखना आवश्यक है।
आनन्द कुमार ’अनन्त‘(स्वा)