

नृत्य महज एक कला ही नहीं, बल्कि एक अद्भुत शक्ति भी है। इतिहास के पन्नों में नृत्य की शक्ति के तमाम सबूत मौजूद हैं। कबीलाई जातियों के लोग तो एक लम्बे अर्से से अपने लोगों के अंदर जातिगत भावनाओं को जगाने से लेकर बेहोशी तक का इलाज नृत्य के ही जरिए करते चले आ रहे हैं। नृत्य या डांस के माध्यम से अच्छी-खासी कसरत तो हो ही जाती है, साथ ही मानसिक, तनाव, डिप्रेशन आदि से भी छुटकारा पाया जा सकता है और बेशक आनंद तो इसमें भरपूर आता ही है।
‘एरोबिक डांस‘ को जो सफलता मिली है, उसकी वजह यही है कि इसमें आवर्ती या बार- बार दोहराई जाने वाली कसरतों और जागिंग को डांस रिद्म दे दिया गया है। वैसे अधिकांश नृत्य तब ‘एरोबिक‘ ही हो जाते हैं जब उन्हें जोरदार ढंग से पेश किया जाता है। यदि कोई सप्ताह में तीन से पांच बार भी आधे-आधे घण्टे तक इस तरह का नृत्य करता है तो उसका शारीरिक स्वास्थ्य तो और बेहतर होगा ही, मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर हो जाता है। सच पूछा जाए तो नृत्य किसी भी तरह की कसरत से किसी भी मायने में उन्नीस नहीं है।
नृत्य से इंसान को एक तरह की स्वतन्त्रता सी भी महसूस होती है। इसे खास तौर पर युवा वर्ग बड़ी आसानी से सहजता के साथ अपना रहा है, लिहाजा आज यह फिटनेस का एक अच्छा और सहज-सरल तरीका साबित हो रहा है। इतना ही नहीं, विभिन्न प्रकार की धुनों पर अपने शरीर को गति देकर बूढ़े से लेकर जवान तक सभी अपनी मानसिक कठिनाइयों से मुक्ति से लेकर शारीरिक विकलांगता तक को ठीक कर रहे हैं।
नृत्य से अन्य कोई कसरत करते समय प्रति मिनट अपनी नाड़ी की गति पर गौर करना बहुत जरूरी होता है। इसके लिए नृत्याभ्यास से पहले अपने चिकित्सक से सलाह अवश्य ले लेनी चाहिए ।
नृत्य करने से पहले ‘वार्म अप‘ और नृत्य के बाद ‘कूल डाउन‘ अवश्य कीजिए ।
अगर आपने पहले से कोई नृत्य या कसरत नहीं की है और आप एकाएक ज्यादा नृत्य या कसरत करना शुरू कर देती हैं तो आपकी मांसपेशियां थोड़ी सख्त हो जाएगी जो स्वाभाविक ही है। अगर नृत्य की वजह से आपके शरीर में दर्द होता है या एक-दो दिन बाद भी आप नृत्याभ्यास करने की स्थिति में नहीं आती हैं तो समझ लीजिए कि आपने आपनी शारीरिक क्षमता से अधिक कसरत की है। ऐसी स्थिति में फौरन अपने चिकित्सक से मिलकर समस्या का निराकरण करवा लीजिए।
ऐसी महिलाओं को नृत्य से परहेज रखना चाहिए जिन्हें गर्भपात हो जाया करता है। अगर आप पहले से ही नृत्याभ्यास करती आ रही है तो गर्भावस्था में भी नृत्य करने में कोई दिक्कत नहीं है मगर सभी डांस या नृत्य आसान एवं कम ऊर्जा को खर्च करने वाले होने चाहिए। गर्भावस्था की स्थिति को ध्यान में रखकर ही आपको यह निर्णय करना होगा कि आपको कौन-सी कसरत करनी है, कितनी करनी है? इस संबंध में अपने चिकित्सक एवं नृत्य शिक्षक से सलाह अवश्य ले लेनी चाहिए ताकि इसकी वजह से बाद में आपको कोई खामियाजा न भुगतना पड़े।
अगर आप हाई ब्लडप्रेशर की मरीज हैं या किसी अन्य तरह की बीमारी से ग्रसित हैं या फिर शारीरिक अपंगता है तो डांसिंग क्लास में जाने से पहले हमेशा किसी फिजियोथेरेपिस्ट या डॉक्टर से अपना चेकअप अवश्य करा लीजिए।
अगर आपकी उम्र 35 साल से अधिक है, आप अस्वस्थ हैं और कभी कोई कसरत नहीं करतीं या आपका वजन बहुत अधिक है या आप किसी दवा का कोर्स पूरा कर रही हैं या बहुत अधिक मात्रा में शराब या धूम्रपान का सेवन करती हैं और परिवार में से किसी को दिल की बीमारी है तो आप नृत्य धीरे-धीरे करना शुरू करें और क्रमशः उसकी सीमा को बढ़ाती जायें।
नृत्य सीखने का सबसे आसान तरीका है डांसिंग क्लास ज्वाइन करना। डांस उसी से सीखिए जिसने खुद डांस की विधिवत् ट्रेनिंग ली हो। और हां, क्लास में सीखने वालों की संख्या भी उतनी ही होनी चाहिए जितने लोगों पर डांस सिखाने वाला व्यक्तिगत तौर पर नजर रख सके ताकि आपको अगर किसी तरह की दिक्कत हो तो आप अपनी दिक्कत उसे आसानी से बता सकें और वह वह आपकी दिक्कतों को दूर कर सके । विभिन्न प्रकार के नृत्यों के दौरान अलग-अलग ऊर्जा खर्च होती है । अब जो विवरण दिया जा रहा है वह 63 किलोग्राम वजन वाली एक महिला के प्रति घण्टे नृत्य पर खर्च होने वाली ऊर्जा पर आधारित है, साथ ही विभिन्न प्रकार के नृत्यों से होने वाले ‘स्वास्थ्य लाभ‘ का भी विवरण प्रस्तुत है-
इस नृत्य के अभ्यास में प्रति घण्टा 620 कैलोरी (ऊर्जा) खर्च होती है। रीढ़ या हड्डी (जोड़ों) की तकलीफ होने पर इसे नहीं करना चाहिए। डान्स के समय खास तौर पर बने जूते अवश्य पहनिए। डान्स जिस फर्श पर किया जा रहा हो उसमें उछाल देने की क्षमता हो तथा डांसिंग हॉल में अत्यधिक भीड़ न हो। डान्स सिखाने वाला प्रशिक्षक पूर्ण ट्रेण्ड होना चाहिए। इस डांस के करने से शरीर के हरेक अंग की कसरत हो जाती है और स्वास्थ्य के साथ-साथ सौंदर्य में भी निखार आने लगता है।
यह नृत्य सबके लिए उपयोगी है और आसान नृत्य भी। इसमें म्यूजिक के साथ-साथ अपने अंगों को झुमाना होता है जिसके लिए थोड़ी-सी एकाग्रता की आवश्यकता होती है। इस डांस में 350 से 650 कैलोरी प्रतिघंटा तक कैलोरी की खपत होती हैं। शालीनता के साथ डिस्को डांस करने वालों को बुढ़ापे में भी चलने-फिरने में कोई दिक्कत नहीं होती है। मानसिक तनावों से छुटकारा दिलाकर सम्पूर्ण शारीरिक सौष्ठव को बनाए रखने में यह लाजवाब होता है।
पूनम दिनकर(स्वास्थ्य दर्पण)