

सुडौल शरीर के लिए आवश्यक हैं व्यायाम, भोजन पर नियंत्रण और आत्मशक्ति । अपनी जीवन शैली और शरीर की जरूरतों के हिसाब से ही हमें व्यायाम और भोजन का चयन करना चाहिए। जागिंग पसन्द हो तो जागिंग या पुराने तरीके के दंड बैठक या फिर साइकिल, जो भी हमें अच्छा लगता हो, वही करना चाहिए। इन सभी चीजों से हमें फायदा अवश्य पहुंचेगा। तैराकी भी अच्छा व्यायाम है और सही ढंग से किया गया घर का कामकाज भी। हम अपने मूड और मौसम के हिसाब से व्यायाम को बदल सकते हैं। बस उसे नियमित रूप से करने की आवश्यकता है।
भोजन और पोषाहार को भी हम अपनी जरूरत के अनुसार बदल सकते हैं। जो खाएं, उस कैलोरी को खर्च करने वाला व्यायाम भी हमें करना चाहिए। जब हम कभी हम पेस्ट्री, गुलाब जामुन या बिरयानी जैसी चीजें खाएं तो उन्हें संतुलित करने के लिए हमें भरपूर व्यायाम करना चाहिए। व्यायाम के द्वारा शरीर की अतिरिक्त चर्बी को पिघलाने से मांसपेशियां भी सुदृढ़ होती हैं, साथ ही हृदय मजबूत होता है और कार्य करने की क्षमता बढ़ती है।
यौवन एवं सौन्दर्य के लिए व्यायाम बहुत आवश्यक है। नियमित वर्जिश से सारे अंग लचीले और खूबसूरत बन सकते हैं। मोटापा स्वास्थ्य के लिए बड़ा भारी खतरा है।
हृदय रोग, पाचन गड़बड़ियां, गठिया और न जाने क्या क्या इसके दुष्परिणाम हैं।
बहुत अधिक खाना, खूब शराब पीना और कुछ न करना मोटापे के कारण हैं क्योंकि जरूरत से जयादा भोजन ही चर्बी बन जाता है। व्यायाम से खाई हुई अतिरिक्त कैलोरी को खर्च किया जा सकता है। तैरने जैसी मजेदार वर्जिश से मजे से आधे घण्टे में 355 कैलोरी खर्च की जा सकती है। साइकिल चलाने से इतने ही समय में 400 कैलोरी खर्च होती है। यदि तेज चाल से एक मील चलें तो 150 कैलोरी खर्च होती है।
अतिरिक्त वजन वाले व्यक्ति खायें सब कुछ लेकिन पहले से कम। खाने में समुचित संतुलन होना चाहिए। भोजन में दूध, मट्ठा, दही, हरी-सब्जियां, दालें, ताजे फल आदि खाने चाहिए। भोजन में तेल और घी का कम मात्रा में प्रयोग करना चाहिए। यदि हम यह निश्चय कर लें कि हमें सुडौल, फुर्तीला शरीर चाहिए तो यही व्यायाम एवं भोजन संतुलन हमारे लिए प्रेरणा बन जाता है। दस मिनट व्यायाम करने के बाद जो ऊर्जा हम प्राप्त करते हैं, वह बड़ी सुखद अनुभूति होती है। बहुत से लोगों को योगासन से बड़ा आनन्द मिलता है। इससे ग्रन्थियों एवं आंतरिक अवयवों की टोनिंग हो जाती है और शरीर के विभिन्न भागों में वजन का वितरण कायदे से होता है।
व्यायाम के विषय में इन बातों को भी ध्यान में रखना चाहिए:-
हमें एक निश्चित समय पर ही व्यायाम करना चाहिए। सुबह का समय सबसे अच्छा रहता है।
प्रतिदिन व्यायाम करना आवश्यक है। नियमितता से बहुत फायदा होता है।
यदि व्यायाम कभी बीच में रोकना पड़े तो फिर से दोबारा शुरू करना चाहिए।
व्यायाम के समय हृदय और मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालना चाहिए।
जब भी छाती में जकड़न या दर्द महसूस हो, सांस फूले या चक्कर आएं या उल्टी सी महसूस हो तो तुरन्त व्यायाम रोक देना चाहिए।
हमें धीमी गति से व्यायाम की शुरुआत करनी चाहिए।
बहुत तेज रफ्तार से व्यायाम प्रारम्भ करने पर हमारी मांसपेशियां और जोड़ सभी कुछ दुखेंगे। शायद कभी चोट भी लग जाए। इसका हृदय पर भी कुप्रभाव पड़ सकता है। स्वस्थ महसूस करने के बजाय हमको बहुत कमजोरी लगेगी और जब शुरुआत में ही इतना सब गड़बड़ा जाएगा तो भला आगे हम इसे कैसे जारी रख सकेंगे।
पहले जाॅगिंग या दौड़ने के बजाय टहलने से शुरुआत करनी चाहिए।
धीमी गति से तैरना चाहिए तथा साइकिल भी चलानी चाहिए।
जब हमारा शरीर व्यायाम का आदी हो जाए, तभी हमें भारी व्यायाम करना चाहिए।
प्रत्येक व्यायाम से पहले हमें चाहिए कि हम शरीर को गरमाने वाली वार्मअप एक्सरसाइज जरूर करें। इससे हमारी मांसपेशियां धीमे-धीमे खुलेंगी और हम आगे भारी व्यायाम के लिए तैयार हो जाएंगे। शुरू में एक स्थान पर सामान्य गति से दो-तीन मिनट तक दौड़ना चाहिए और फिर दो-तीन मिनट तक मांसपेशियों को तानना चाहिए। इस वार्मअप से हृदय को आवश्यक आक्सीजन मिलेगी और हमारा रक्तचाप भी समायोजित होगा।
निर्धारित व्यायाम के पश्चात् हमें शरीर को सामान्य करने वाला व्यायाम भी करना चाहिए। व्यायाम के तुरन्त बाद ठंडे गर्म पानी से न नहाए बल्कि शरीर को धीरे-धीरे सामान्य लय में लाने का प्रयास करना चाहिए।
शरीर के विभिन्न अंगों और क्षमताओं के लिए विभिन्न व्यायाम बताए जाते हैं।
उदाहरण के लिए भारोत्तोलन व्यायाम से मांसपेशियों में कसाव आता है और उनकी क्षमता बढ़ती है। तैराकी और साइकिलिंग से हृदय को अधिक ऑक्सीजन मिलती है और वह स्वस्थ होता है। तैरने से भीतरी अवयव भी सही कार्य करते हैं और साइकिलिंग से हाथ पैरों की अतिरिक्त चर्बी छंटती है और वे सशक्त बनते हैं। हमें हमारी रुचि के अनुसार व्यायाम चुनना चाहिए तथा उसे नियमित रूप से करना चाहिए।
व्यायाम हमारे शरीर को निरन्तर लाभ पहुंचाने वाली प्रक्रिया है। धीरे-धीरे शुरुआत करके इसमें हमें बढ़त भी करते रहना चाहिए। बढ़त गति की भी हो और बारम्बारता की भी, तभी शारीरिक क्षमता भी बढ़ती है और सुडौलता भी। इस प्रकार हम व्यायाम के द्वारा अपने शरीर को स्वस्थ और सुडौल रख सकते हैं। हिमाली पंत(स्वास्थ्य दर्पण)