डेंगू में सिर्फ प्लेटलेट नहीं घटता, लिवर पर भी पड़ सकता है असर

बुखार उतरने के बाद भी 48 से 72 घंटे सतर्क रहने की सलाह
सांकेतिक चित्र
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मधुर, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : बारिश और जगह-जगह जमा पानी के बीच राज्य में डेंगू का खतरा बढ़ता जा रहा है। अस्पतालों में डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। डॉक्टरों के मुताबिक बारिश के बाद अगर पानी पांच से सात दिनों तक जमा रहता है तो उसमें एडीज मच्छर के लार्वा पनप सकते हैं। यही मच्छर डेंगू फैलाता है। बदलते मौसम के कारण आने वाले कुछ महीनों तक डेंगू का खतरा बने रहने की आशंका जताई जा रही है।

सुबह और शाम ज्यादा सक्रिय रहता है एडीज मच्छर

मेडिसिन विशेषज्ञों के अनुसार एडीज एजिप्टी मच्छर सुबह और शाम के समय ज्यादा सक्रिय रहता है। खासकर सुबह 8 से 10 बजे और शाम 4 से 8 बजे के बीच इसके काटने का खतरा अधिक रहता है। आमतौर पर यह मच्छर पैरों के आसपास काटता है। इसलिए मच्छरों के प्रकोप वाले इलाकों में मच्छरदानी का इस्तेमाल करने और घर के अंदर व आसपास पानी जमा नहीं होने देने की सलाह दी गई है।

सिर्फ प्लेटलेट कम होना ही डेंगू का खतरा नहीं

विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू को केवल बुखार या प्लेटलेट कम होने से जोड़ना सही नहीं है। गंभीर स्थिति में डेंगू का असर लिवर पर भी पड़ सकता है। शरीर में वायरल लोड बढ़ने पर लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा पेट में पानी जमा होने और प्लेटलेट कम होने की समस्या भी हो सकती है। ऐसे में मरीज की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी है। डॉक्टरों के मुताबिक डेंगू के गंभीर मामलों में मल्टी ऑर्गन फेल्योर का खतरा भी हो सकता है। बुखार के साथ बेहोशी, दौरे, सीने में दर्द, जॉन्डिस और किडनी से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं।

बुखार उतरने के बाद भी रहें सावधान

डेंगू में बुखार उतर जाना पूरी तरह ठीक होने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। डॉक्टरों के अनुसार बुखार कम होने के बाद अगले 48 से 72 घंटे मरीज के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान शरीर में पानी की कमी होने से कई अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। गंभीर स्थिति में लिवर, फेफड़े और हृदय जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर भी असर पड़ सकता है।

कब कराएं डेंगू की जांच?

बुखार के साथ पेट खराब जैसी समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह से डेंगू की जांच कराई जा सकती है। शुरुआती दिनों में एनएस1 एंटीजन टेस्ट किया जाता है। वहीं बुखार के पांच दिन बाद आईजीएम एंटीबॉडी टेस्ट उपयोगी होता है। इसके अलावा कई जगह नैट भी किया जाता है, जो वायरस की जेनेटिक विशेषताओं का पता लगाने में मदद करता है।

बच्चों में इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

बच्चों में बुखार के साथ जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में ऐंठन और ग्रंथियों में सूजन जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टरों की सलाह लेने की जरूरत है। बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी हो तो भी इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

बचाव के लिए क्या करें?

घर और आसपास पानी जमा न होने दें

पानी की टंकियों और बर्तनों को ढककर रखें

मच्छरदानी का इस्तेमाल करें

मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं

पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं

बार-बार थोड़ी मात्रा में हल्का और घर का बना खाना लें

बुखार होने पर डॉक्टर की सलाह से जांच कराएं

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