बर्न सर्वाइवर्स के लिए शुरू हुआ सामुदायिक सपोर्ट नेटवर्क

देश में पहली बार अस्पताल से जुड़ा समर्पित सपोर्ट ग्रुप
बर्न सर्वाइवर्स के लिए शुरू हुआ सामुदायिक सपोर्ट नेटवर्क
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : गंभीर रूप से जलने के बाद मरीजों की जिंदगी अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी आसान नहीं होती। शारीरिक परेशानी के साथ उन्हें मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसी जरूरत को देखते हुए डिसन अस्पताल ने ‘फीनिक्स बर्न सपोर्ट ग्रुप’ की शुरुआत की है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, यह पूर्वी भारत की पहली समर्पित बर्न सर्वाइवर्स सपोर्ट पहल है और कोलकाता का पहला अस्पताल-आधारित बर्न सर्वाइवर सपोर्ट ग्रुप है।

इस पहल की शुरुआत डिसन अस्पताल के सीनियर डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन एंड क्रिटिकल केयर और फीनिक्स के संस्थापक डॉ. मोहित खरबंदा ने की। इसके तहत बर्न सर्वाइवर्स और उनके परिवारों को अस्पताल से छुट्टी के बाद भी लंबे समय तक मुफ्त मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग, फिजियोथेरेपी, पोषण संबंधी सलाह और स्कार केयर उपलब्ध कराया जाएगा।

चार प्रमुख स्तरों पर मिलेगी मदद

फीनिक्स कार्यक्रम को चार प्रमुख स्तंभों पर तैयार किया गया है। इनमें मनोवैज्ञानिक सहायता, शारीरिक पुनर्वास, डायटरी सपोर्ट और स्कार एवं कॉस्मेटिक केयर शामिल हैं। मनोवैज्ञानिक सहायता के तहत काउंसलिंग और पीयर सपोर्ट दिया जाएगा। फिजियोथेरेपी, स्प्लिंटिंग और मोबिलिटी गाइडेंस के जरिए शारीरिक पुनर्वास में मदद की जाएगी। वहीं, प्रत्येक सर्वाइवर की जरूरत के अनुसार न्यूट्रिशन काउंसलिंग दी जाएगी। स्कार मैनेजमेंट के साथ जरूरत पड़ने पर रिकंस्ट्रक्टिव केयर के लिए रेफरल की सुविधा भी उपलब्ध होगी।

गौरतलब है कि देश में हर वर्ष आग से संबंधित घटनाओं में करीब 23 हजार मौतें होती हैं, जो दुनिया में ऐसी मौतों का लगभग पांचवां हिस्सा है। आग से होने वाली चोटों के कारण हर साल करीब 15 लाख स्वस्थ जीवन-वर्ष का नुकसान होने का अनुमान है। 15 से 34 वर्ष की महिलाओं में इसी आयु वर्ग के पुरुषों की तुलना में बर्न से मृत्यु का जोखिम चार गुना तक अधिक बताया गया है।

फीनिक्स में किसी भी अस्पताल में इलाज करा चुके बर्न सर्वाइवर्स और उनके परिवार शामिल हो सकेंगे। मरीज अस्पताल से छुट्टी के समय या उसके बाद किसी भी समय इसमें नामांकन करा सकते हैं। डिसन अस्पताल के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर सजल दत्ता ने कहा कि जलने की चोट घाव भरने के साथ खत्म नहीं होती। रिकवरी की प्रक्रिया लंबी हो सकती है और इसका असर शारीरिक स्वास्थ्य, भावनात्मक स्थिति, आत्मविश्वास और सामान्य जीवन में वापस लौटने की क्षमता पर पड़ सकता है। फीनिक्स के माध्यम से सर्वाइवर्स और उनके परिवारों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश है कि वे इस सफर में अकेले नहीं हैं।

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