बुरी आदतों को कैसे छोड़ें?

स्वस्थ जीवन
bad habits
बुरी आदतें कैसे छोड़ेंसांकेतिक चित्र इंटरनेट से साभार
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मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आदत शब्द का प्रयोग किया जाता है। शिक्षालयों में शिक्षार्थी को नैतिक शिक्षा के अन्तर्गत सिखाया जाता है-प्रातः उठो, बड़ों का आदर करो, स्वच्छता से रहो, परिश्रम करो इत्यादि। इन सभी वाक्यांशों से आदतों के निर्माण का बोध होता है। आदतों का जीवन में बहुत महत्व है। आदतों के दो पक्ष होते हैं-अच्छी आदतें और बुरी आदतें। अच्छी आदतों द्वारा व्यक्ति व समाज का कल्याण संभव है तथा बुरी आदतें व्यक्ति व समाज दोनों के लिए दुखदायी हैं।

आदत एक स्वचालित आचरण होने के साथ ही एक मानसिक गुण भी है। व्यक्ति के नित्य प्रति के जीवन में प्रत्येक कार्य निर्धारित किए बिना तथा बगैर सोचे-विचारे संपन्न होते रहते हैं। यह नित्य प्रति के कार्य यथासमय बिना सोचे-विचारे होना व्यक्ति की आदतों का परिणाम है इसलिए व्यक्ति के प्रतिदिन के क्रियाकलापों में समानता पाई जाती है। किसी कार्य को एक विशिष्ट तरीके से करना आदत का परिणाम है। आदतें अर्जित होती हैं जिन्हें मनुष्य अपने प्रयत्नों से प्राप्त करता है।

आदत व्यक्ति के प्रयत्नों का परिणाम है। आदतों के निर्माण तथा उन्हें बनाए रखने के लिए व्यक्ति को कठिन प्रयास व प्रयत्न करने पड़ते हैं तथा बुरी आदतांे को छोड़ने व तोड़ने के लिए भी मनुष्य को लाख कोशिश करनी पड़ती है, तब कहीं जाकर वह बुरी आदत छूटती है। किसी भी बुरी आदत को छोड़ने के लिए विपरीत आदत डालना अत्यावश्यक हैं उदाहरणतः अधिक चाय पीने की आदत को छोड़ने के लिए कम चाय पीने की आदत डालना, प्रातः देर से उठने की आदत को छोड़ने के लिए जल्दी उठने की आदत डालना आदि।

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि जो कारण आदतों के निर्माण में सहायक होते हैं वे ही कारण आदतों को छोड़ने के लिए भी सहायक होते हैं। इसके अतिरिक्त कुछ ऐसे उपाय हैं जिनके माध्यम से बुरी आदतों को छोड़ा जा सकता है। कुछ प्रमुख कारकों का उल्लेख निम्नलिखित हैं:-

वातावरण में परिवर्तन :-

कई आदतों का संबंध किसी विशेष वातावरण से होता है और उस वातावरण में व्यक्ति उसी आदत का आचरण करने लग जाता है। ऐसी स्थिति में बुरी आदत को छुड़ाने के लिए यह आवश्यक है कि उसका वातावरण बदल दिया जाए। उदाहरणार्थ-पड़ोस के कुछ बच्चों की आदत होती है कि वे बड़े व्यक्तियों का अनुसरण करके सिगरेट, बीड़ी, आदि पीने लगते हैं। ऐसे में हमें उन बालकों को पड़ोस घर से बाहर ही नहीं निकलने देना चाहिए अथवा उन्हें सिगरेट व बीड़ी पीने से होने वाले नुकसान का ज्ञान देना चाहिए। तभी उनकी आदत छूटेगी।

घृणा व अरुचि विकसित करके:-

अनेक वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी भी कार्य की आदत को छुड़ाने के लिए उसकी अति कर देनी चाहिए। अति के परिणाम सदैव कड़वे होते हैं। अतः व्यक्ति उन कटु परिणामों से बचने की कोशिश करता है तथा उससे संबंधित कार्य को छोड़ देता है। जैसे किसी व्यक्ति को अधिक चाय पीने की आदत है। उसकी चाय पीने की आदत को छुड़ाने के लिए उसे अत्यधिक चाय पीने को दें। ऐसा करने से उसकी चाय के प्रति घृणा व अरुचि उत्पन्न हो जाएगी तथा वह चाय स्वतः ही छोड़ देगा।

कई आदतें बहुत ही विकट होती हैं। ऐसी आदतें एकाएक नहीं छूटती। इसके लिए क्रमिक त्याग विधि को अपनाना चाहिए। इस विधि के द्वारा व्यक्ति अपनी बुरी आदत को धीरे-धीरे क्रमिक रूप से कम करते हुए समाप्त कर सकता है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार किसी बुरी आदत को तोड़ने की एक अन्य विधि नवीन आदत का निर्माण है। इस नवीन आदत के निर्माण द्वारा व्यक्ति का उत्साह नवीन आदत को सबल बनाने में लग जाता है तथा बुरी आदत कम होने लगती है।

आत्मनिर्देश विधि भी बुरी आदतों को तोड़ने में सहायक है। इस विधि के द्वारा व्यक्ति स्वयं को यह सुझाव देता है कि यह आदत बुरी है। इसके परिणाम भयंकर होंगे तथा इसके त्यागने में अनेक लाभ हैं। इस प्रकार निरंतर आत्मनिर्देश द्वारा बुरी आदत शनै:-शनै: स्वतः ही छूट जाती है। रेनुका श्रीवास्तव(स्वास्थ्य दर्पण)

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