भगवान तिरुपति की कृपा

तिरुपति बालाजी
तिरुपति बालाजी
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भगवान तिरुपति बालाजी को भारत के सबसे अमीर देवताओं में से एक माना जाता है। तिरुपति जी के दरबार में बड़े से बड़े अमीर और गरीब दोनों जाते हैं, हर साल लाखों लोग भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए तिरुमला की पहाडि़यों पर भीड़ लगाते हैं। माना जाता है कि भगवान तिरुपति बालाजी अपनी पत्नी पद्मावती के साथ तिरुमला में निवास करते हैं। ऐसे कहा जाता है कि यदि कोई भक्त कुछ भी सच्चे दिल से मांगता है तो भगवान उसकी सारी मुरादें पूरी करते हैं और वे लोग जिनकी मुराद भगवान पूरी कर देते हैं, वे अपनी इच्छा अनुसार वहां पर अपने बाल दान कर के आते हैं। तिरुपति बालाजी का मंदिर आंध्र-प्रदेश के तिरुमला पहाड़ों में है, इस मंदिर में बहुत बड़े और अमीर लोग आते हैं और वे अपनी इच्छा अनुसार दान भी करते हैं, इस कारण से आज यह मंदिर अमीर मंदिरों में गिना जाता है, आपको बता दें कि भगवान तिरुपति बालाजी को वेंकटेश्वर, श्रीनिवास और गोविंदा के नाम से भी जाना जाता है।

मान्यताएँ

इस मंदिर के बहुत ज्यादा विख्यात होने का कारण यहाँ के अद्भुत चमत्कार हैं। इस मंदिर से बहुत सारी मान्यताएँ जुड़ी हैं जो आप मानें या न मानें लेकिन वहाँ के भक्त इन्हें बहुत मानते हैं। तो जानिये आज हम आपको तिरुपति बालाजी मंदिर के ऐसे रहस्य बताएँगे जिन्हें जानकर आप दंग रह जाएंगे।

  • कहा जाता है कि इस मंदिर में वेंकटेश्वर स्वामी की मूर्ति पर लगे हुए बाल असली हैं और ये कभी भी उलझते नहीं हैं और हमेशा मुलायम रहते हैं, लोगों का मानना है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि यहाँ पर खुद भगवान विराजते हैं।

  • अगर आप मंदिर में जाते हैं तो भगवान बालाजी की मूर्ति पर अगर कान लगा के सुना जाए तो आप आश्चर्य-चकित हो जाएँगे क्योंकि जब आप कान लगाएँगे तो आपको समुद्र की आवाज सुनाई देगी और इसी कारणवश हमेशा बालाजी की मूर्ति नम रहती है। आपको यहाँ एक अजब सी शान्ति प्रतीत होगी।

  • मंदिर में मुख्य द्वार के दरवाजे के दाईं ओर एक छड़ी है। इस छड़ी के बारे में कहा जाता है कि इस छड़ी से बालाजी के बाल रूप की पिटाई की गई थी जिस कारण-वश उनकी ठोड़ी पे चोट लग गई। तबसे आज तक उनके ठोड़ी पर हमेशा से चंदन का लेप लगाया जाता है ताकि उनका घाव भर जाए।

  • बालाजी के इस मंदिर में एक दीया हमेशा जलता रहता है। इसमें न कभी तेल डाला जाता न ही घी, सोचने और आश्चर्य करने वाली बात ये है कि कोई भी नहीं जानता कि यह दीया कब और किसने जलाया था क्योंकि ये दीया वर्षों से जलता ही आ रहा है।

  • अगर आप दर्शन करने के लिए बालाजी के मंदिर में जाएँगे तो आश्चर्य में पड़ जाएँगे क्योंकि जब आप बालाजी के मूर्ति को गर्भ-गृह से देखेंगे तो भगवान की मूर्ति मंदिर के गर्भ-गृह के मध्य में स्थित पाएंगे लेकिन जब आप इसे बाहर आकर देखेंगे तो पाएँगे कि मूर्ति मंदिर के दाईं और स्थित है।

  • भगवान बालाजी की प्रतिमा पर एक खास तरह का पचाई कपूर लगाया जाता है। अगर इसे किसी भी पत्थर पर चढ़ाया जाता हैं तो वो कुछ समय के बाद ही चटक जाता है किन्तु भगवान की प्रतिमा को कुछ नहीं होता। ’मंदिर में मूर्ति पर जितने भी फूल-पत्ती या तुलसी के पत्ते चढ़ाते हैं वो सबके सब भक्तों को न देकर पीछे उपस्थित एक जलकुंड है उन्हें वहीं पीछे देखे बिना उनका विसर्जन किया जाता है क्योंकि पुष्प को देखना और रखना अच्छा नहीं माना जाता है।

  • प्रत्येक गुरुवार के दिन तिरुपति बालाजी को पूर्ण रूप से पूरा का पूरा चंदन का लेप लगाया जाता है और जब उसे हटाया जाता है तब वहाँ खुद-ब-खुद ही माता लक्ष्मी की प्रतिमा उभर आती हैं। ये आज तक नहीं पता चल पाया हैं ऐसा क्यों होता हैं और भगवान तिरुपति बालाजी को प्रतिदिन नीचे धोती और ऊपर साड़ी से सजाया जाता है।

  • मंदिर से किलोमीटर दूर एक गाँव है, उस गाँव में बाहरी व्यक्ति का प्रवेश निषेध है। वहाँ पर लोग नियम से रहते हैं। वहीं से लाए गये फूल भगवान को चढ़ाए जाते हैं और वहीं की ही वस्तुओं को चढ़ाया जाता है जैसे- दूध, घी, माखन आदि।

  • तिरुपति मंदिर में भक्तों द्वारा बहुत दान किया जाता है। मान्यतानुसार इस मंदिर में दान की परम्परा विजयनगर के राजा कृष्णदेवराय के समय से चली आ रही है। राजा कृष्णदेवराय इस मंदिर में हीरे, सोना-चाँदी आदि का बहुत दान करते थे।

नदी के तट पर विष्णु ने श्रीनिवास भगवान के रुप में जन्म लिया था। पुराणों के अनुसार वेंकटम पर्वत को विष्णु के वाहन गरुड़ द्वारा भूमि पर लाया गया था। भविष्यपुराणानुसार विष्णु जब अपने शयनकक्ष में सो रहे थे तो महर्षि भृगु ने उनकी छाती पर जोर से प्रहार किया था। इस पर माता लक्ष्मी जी को बहुत दुख हुआ और उनके दुखी हो कर वहां से चले जाने पर भगवान विष्णु को बहुत दुख हुआ और वे तिरुमला पर्वत पर निवास करने लगे। तिरुपति का सम्पूर्ण क्षेत्रा भगवान विष्णु को बैकुंठ धाम के बाद सबसे ज्यादा प्रिय है। (उर्वशी)विनय कुमार मिश्र

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