

आगर-मालवा की हरियाली के बीच हजार साल पुराना इतिहास
शहर से करीब पांच किलोमीटर दूर इंदौर-कोटा अंतरराज्यीय मार्ग पर हरियाली से घिरी पहाड़ियों के बीच स्थित बाबा बैजनाथ महादेव का मंदिर सदियों पुराना धार्मिक केंद्र है। घंटियों की गूंज, अगरबत्ती की महक, बाणगंगा की कलकल धारा और ठंडी हवाओं के बीच यह स्थान अलौकिक शांति का अहसास कराता है। मंदिर केवल आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि इसके हर पत्थर में इतिहास समाया हुआ है। परिसर में मौजूद सती के ओटले का संवत 1116 का शिलालेख इस बात की पुख्ता गवाही देता है कि इस क्षेत्र में एक हजार साल से भी पहले से धार्मिक गतिविधियां और आबादी मौजूद थी।
मंदिर का निर्माण और शुरुआती स्वरूप
ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, वर्ष 1528 में बेट बैजनाथ खेड़ा गांव में मौड़ वैश्य समाज द्वारा इस मंदिर की नींव रखी गई थी, जो 1536 में बनकर तैयार हुआ। शुरुआती करीब 350 वर्षों तक यह स्थान ज्वालामुखीय पत्थरों की दीवारों वाले एक मठ के रूप में संचालित होता रहा। समय के साथ इसने कई बदलाव देखे और अंततः इसने वह ऐतिहासिक दौर भी देखा, जिसने इसे ब्रिटिश काल से जोड़ दिया।
ब्रिटिश अधिकारी कर्नल मार्टिन और लेडी मार्टिन की मन्नत
सन् 1880 के दशक में जब उत्तर प्रदेश के आगर में अंग्रेजी छावनी थी, तब वहां कर्नल मार्टिन तैनात थे। किसी युद्ध के सिलसिले में उन्हें अफगानिस्तान के काबुल जाना पड़ा। लंबे समय तक पति की कोई खबर न मिलने पर उनकी पत्नी लेडी मार्टिन बेहद चिंतित हो गईं। किसी के सुझाव पर वह बाबा बैजनाथ के दरबार में पहुंचीं और मन्नत मांगी कि यदि उनके पति सकुशल लौट आएँ, तो वह मंदिर के शिखर का निर्माण करवाएंगी। कुछ ही दिनों बाद कर्नल मार्टिन का पत्र आया, जिसमें उन्होंने जिक्र किया था कि युद्ध के दौरान एक बड़े बालों वाले, हाथ में त्रिशूल लिए और बैल पर सवार अज्ञात व्यक्ति ने उनकी रक्षा की थी। इस रहस्यमयी घटना और पति के सकुशल लौटने के बाद लेडी मार्टिन ने अपनी मन्नत पूरी करते हुए 1882 में मंदिर के शिखर का निर्माण कार्य शुरू कराया, जिसका शिलालेख आज भी इस घटना का जीवंत प्रमाण है।
वास्तुकला और मंदिर परिसर की भव्यता
वर्तमान में यह मंदिर अपनी भव्यता और अनूठी वास्तुकला के लिए जाना जाता है। मंदिर का करीब 50 फीट ऊंचा शिखर उत्तर भारतीय और द्रविड़ियन स्थापत्य शैली का बेहतरीन संगम है। इसके गर्भगृह के मध्य में आग्नेय पाषाण से निर्मित पावन शिवलिंग स्थापित है, जिसके ठीक सामने 14 खुले द्वारों वाला एक विशाल सभा मंडप और प्राचीन नंदी प्रतिमा मौजूद है। शिखर के मध्य भाग में ब्रह्मा, विष्णु और महेश की मूर्तियां तथा सबसे ऊपर सुशोभित स्वर्ण कलश मंदिर की दिव्यता को और अधिक बढ़ा देते हैं। इसके अतिरिक्त, परिसर के आसपास गौमुख कुंड, छोटे शिवालय, सप्तऋषि को समर्पित सात मंदिर, प्राचीन वराह प्रतिमा, मां अन्नपूर्णा का मठ, तथा बाणगंगा के पार भैरवनाथ, मंगलनाथ, हनुमान मंदिर और शबरी आश्रम जैसे कई पवित्र स्थल स्थित हैं।
वकील जय नारायण बापजी से जुड़ा चमत्कारी प्रसंग
बाबा बैजनाथ से जुड़े चमत्कारों की फेरिहरि में नित्यानंद जी के शिष्य और पेशे से वकील जय नारायण बापजी की कथा भी बेहद प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि एक बार वे अदालत में केस लड़ने जाने वाले थे, लेकिन बाबा की साधना में ऐसे लीन हुए कि उन्हें समय का ध्यान ही नहीं रहा। चमत्कारी रूप से उस दिन बाबा बैजनाथ ने स्वयं अदालत पहुंचकर उनके पक्षकार की पैरवी की और केस जिता दिया। बाद में जब सबको पता चला कि जय नारायण जी तो अदालत गए ही नहीं थे और वे लगातार मंदिर में साधना कर रहे थे, तो इस घटना ने श्रद्धालुओं की आस्था को और अधिक प्रगाढ़ कर दिया।