उड़ने की वजह

कविता
Poem
उड़ने की वजहAI Generated Image
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पंख नहीं थे फिर भी,

मैंने आसमान चुन लिया,

रास्ते मुश्किल थे मगर,

मैंने चलना सीख लिया।

लोगों ने कहा—“रुक जाओ,

ये मंज़िल आसान नहीं,”

दिल ने कहा—“चलते रहो,

कोशिश कभी बेकार नहीं।”

गिरकर उठना सीखा मैंने,

आँसू छुपाकर हँसना भी,

टूटे सपनों के टुकड़ों से,

नया ख़्वाब बनाना भी।

हर सुबह एक उम्मीद बनी,

हर रात ने कुछ सिखाया,

जिसे मैं अपनी हार समझी,

वही मुझे आगे ले आया।

अब डर नहीं किसी तूफ़ान का,

न मंज़िल की जल्दी है,

मुझे पता है—मेरी उड़ान

अभी बहुत लंबी चलनी है।

-खुशी डागा

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