सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर सख्त रोक

विपक्ष ने कहा– खामियां दूर करने के बजाय सरकार ने उन्हें दुनिया से छुपाने का रास्ता चुना
सांकेतिक तस्वीर
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जयपुर : राजस्थान सरकार ने सरकारी स्कूलों के परिसर में 'बाहरी लोगों' के प्रवेश पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत स्कूल परिसर में प्रधानाचार्य की पूर्व अनुमति के बिना बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित होगा और लिखित मंजूरी के बिना छात्रों, शिक्षकों या स्कूल की गतिविधियों से जुड़ी फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग पर भी रोक लगा दी गई है।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार द्वारा जारी ये निर्देश राज्य में अनेक जगह सरकारी स्कूलों के छात्रों द्वारा शिक्षकों की कमी, कक्षा कक्षों की कमी व अन्य बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों को लेकर हाल ही में किए गए विरोध-प्रदर्शनों के बीच आया है। इनमें से कई विरोध-प्रदर्शनों को व्यापक कवरेज मिली थी।

आधिकारिक परिपत्र में कहा गया है कि राज्य सरकार 'अभिभावक के समान दायित्व' के सिद्धांत के अंतर्गत, राजकीय विद्यालयों में अध्ययनरत सभी बच्चों की सुरक्षा, गरिमा, निजता एवं कल्याण की विशेष जिम्मेदारी वहन करती है।

भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक बच्चे को जीवन, गरिमा एवं निजता का अधिकार प्रदान करता है। साथ ही निजता के अधिकार को अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता प्रदान की है।

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राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की स्कूल सुरक्षा नीति एवं दिशा-निर्देश इस बात पर बल देते हैं कि प्रत्येक विद्यालय बच्चों के लिए सुरक्षित, संरक्षित एवं बाल-अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराए तथा उन्हें शोषण एवं निजता के अतिक्रमण से संरक्षण प्रदान करे।

निर्देशों के तहत, प्रधानाचार्य/संस्था प्रधान की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी बाहरी व्यक्ति को विद्यालय परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी, केवल ये शासकीय अधिकारी अपवाद होंगे, जो अपने आधिकारिक दायित्वों के निर्वाह हेतु विधिवत अधिकृत हों।

इसके तहत प्रत्येक आगंतुक विद्यालय परिसर में प्रवेश करने से पूर्व विजिटर रिजिस्टर में अपनी प्रविष्टि करेगा। इसी तरह प्रधानाचार्य, किसी शिक्षक अथवा अधिकृत विद्यालय अधिकारी के साथ हुए बिना कोई भी बाहरी व्यक्ति कक्षा-कक्ष, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, छात्रावास, खेल मैदान, शौचालय अथवा विद्यार्थियों की किसी भी गतिविधि वाले क्षेत्र में प्रवेश नहीं करेगा।

प्रधानाचार्य की पूर्व लिखित अनुमति के बिना विद्यार्थियों, शिक्षकों अथवा विद्यालय गतिविधियों का फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, साक्षात्कार, ऑडियो रिकॉर्डिंग अथवा लाइव स्ट्रीमिंग नहीं की जाएगी तथा यह केवल विधि सम्मत उद्देश्य के लिए ही अनुमन्य होगी।

निर्देशों के अनुसार विद्यालय प्राधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि विद्यार्थियों के फोटो, वीडियो अथवा व्यक्तिगत जानकारी का ऐसा संग्रह, प्रकाशन अथवा प्रसार न हो जिससे उनकी निजता, गरिमा अथवा सुरक्षा प्रभावित हो।

दिशा निर्देश में कहा गया है कि प्रधानाचार्य को किसी भी ऐसे आगंतुक को प्रवेश से मना करने का अधिकार दिया गया है जिसकी उपस्थिति से सुरक्षा, निजता, अनुशासन या शैक्षिक माहौल पर असर पड़ सकता हो।

इसके मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति बिना अनुमति के अंदर आता है,स्कूल परिसर से जाने से मना करता है, बिना इजाजत फोटो या वीडियो लेने की कोशिश करता है या स्कूल के कामकाज में रुकावट डालता है तो प्रधानाचार्य तुरंत स्थानीय पुलिस और जिला शिक्षा अधिकारी को सूचित कर सकते हैं ताकि नियमों के तहत कार्रवाई की जा सके।

इस बीच राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीका राम जुली ने इसकी आलोचना करते हुए इसे तानाशाही आदेश करार दिया है।

उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, भाजपा सरकार ने टूटी छतों, टपकती कक्षाओं और शिक्षकों की भारी कमी का बेहतरीन समाधान निकाल लिया है। इन खामियों को दूर करने का नहीं, बल्कि इन्हें दुनिया की नजरों से छुपाने का आदेश जारी कर दिया है। अब बिना अनुमति कोई अंदर नहीं जा सकेगा, ताकि हकीकत बाहर न आ सके।

जूली के अनुसार, इस तानाशाही आदेश को राज्य सरकार जल्द से जल्द वापस ले, वरना इसके विरुद्ध सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाया जाएगा।

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