25 करोड़ से बदलेगा राजस्थान का सबसे पुराना संग्रहालय 'अल्बर्ट हॉल', जानें क्या-क्या बदलेगा

QR code और light show से मिलेगी पुरावस्तुओं की डिजिटल जानकारी
संग्रहालय
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जयपुर : जयपुर में राजकीय केंद्रीय संग्रहालय (अल्बर्ट हॉल) को अब अंतरराष्ट्रीय स्वरूप दिया जाएगा और इसके लिए विभिन्न तैयारियों के साथ साथ इसका सौंदर्यीकरण किया जाएगा, जिसके लिए राज्य सरकार की ओर से 25 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है।

संग्रहालय के अधीक्षक महेन्द्र कुमार निम्हल ने बताया कि अल्बर्ट हॉल का संरक्षण और जीर्णोद्धार किया जाएगा, इसकी खूबसूरती में चार-चांद लगाने के लिए विशेष तरह की प्रकाश व्यवस्था जाएगी एवं तीन जगहों पर सेंसरयुक्त दरवाजे लगाए जाएंगे।

निम्हल ने बताया कि केंद्रीय संग्रहालय में स्थित 18 विभिन्न दीर्घाओं में अलग-अलग पुरावस्तुओं को प्रदर्शित किया गया है और इन दीर्घाओं को वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया जाएगा ताकि वहां रखी पुरावस्तुएं खराब नहीं हों।

इन दीर्घाओं में अंतरराष्ट्रीय दीर्घा, पॉटरी दीर्घा, मूर्तिकला दीर्घा, लाख की दीर्घा, सिक्का दीर्घा, गलीचा दीर्घा, अस्त्र-शस्त्र दीर्घा, काष्ठ कला दीर्घा, संगीत वाद्ययंत्र दीर्घा, आभूषण तथा हस्तिदंत दीर्घा आदि शामिल हैं।

निम्हल ने कहा, प्रत्येक दीर्घा में QR code लगाया जाएगा। पर्यटकों को एक बटन दबाने पर राजस्थान के इतिहास, कला-संस्कृति, खान-पान, वेशभूषा, आभूषण, पगड़ी-साफा, लोकगीत समेत कई जानकारियां मिलेंगी।

अधीक्षक ने बताया कि पर्यटन सीजन में इस संग्रहालय में एक दिन में करीब 8 हजार और सामान्य दिनों में 1500 से 2000 पर्यटक आते हैं। ‘‘ऐसे में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए देश के अन्य राज्यों के केंद्रीय संग्रहालय की तरह अल्बर्ट हॉल को भी अलग तरीके से तैयार किया जाएगा।

निम्हल ने बताया कि स्वागत कक्ष पर एलईडी स्क्रीन लगाई जाएगी जिसमें अल्बर्ट हॉल का पूरा इतिहास बताया जाएगा। ऐसा होने से पर्यटकों को संग्रहालय के अंदर प्रवेश करने से पहले ही वहां रखी पुरावस्तुओं की जानकारी मिल जायेगी।

अधीक्षक ने कहा, रात्रि पर्यटन के तहत पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए रोजाना लाइट शो होगा, जिसमें अल्बर्ट हॉल पर अलग-अलग तरह की रोशनी करके पर्यटकों को रोमांचित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि संग्रहालय का मुख्य आकर्षण यहां रखी मिस्र की ममी है जिसके इतिहास को जानने के लिए हजारों पर्यटक यहां आते हैं। तूतू नामक महिला की यह मृत देह मिस्र के प्राचीन नगर अखमीन से यहां लाई गई थी। उन्होंने कहा कि यह 322 से 30 ईसवी पूर्व के टोलोमाइक युग की है और इसे कांच के एक विशेष बक्से में सुरक्षित रखा गया है।

निम्हल ने बताया कि करीब 2300 साल पुरानी इस ममी का वर्ष 2011 में एक्सरे करवाया गया था, जिसमें पता चला कि उसकी 206 हड्डियां सही सलामत हैं। ममी का एक्सरे भी संग्रहालय में प्रदर्शित है।

अल्बर्ट हॉल के अलावा देश के पांच संग्रहालयों में भी ममी रखी हुई हैं, जिनमें भारतीय संग्रहालय (कोलकाता), तेलंगाना राज्य पुरातत्व संग्रहालय (हैदराबाद), छत्रपति शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय (मुंबई), राज्य संग्रहालय (लखनऊ) और वडोदरा संग्रहालय शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि अल्बर्ट हॉल की नींव वेल्स के राजकुमार अल्बर्ट एडवर्ड ने 1876 में रखी थी तथा इसका डिजाइन 1887 में वास्तुकार सैमुअल स्विंटन जैकब ने तैयार किया था। इसका निर्माण महाराजा सवाई राम सिंह द्वितीय ने कराया और इसका नाम तत्कालीन प्रिंस अल्बर्ट के भारत दौरे के दौरान रखा गया। वर्तमान में इसमें करीब 24,930 से ज्यादा प्रदर्शनियां हैं, जो पर्यटकों को आकर्षित करती है।

अधीक्षक ने बताया कि संग्रहालय में प्रदर्शित 19वीं शताब्दी की पीतल की ढाल में उभरे छोटे—छोटे फलकों पर राम कथा अंकित है, वहीं ढाल के चारों ओर रामायण की घटनाओं का वर्णन करते हुए संस्कृत के श्लोक उत्कीर्ण है। एक अन्य ढाल पर महाभारत के दृश्यों को दिखाया गया है।

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