

जयपुर : राज्य वृक्ष खेजड़ी के संरक्षण की मांग को लेकर सोमवार को बीकानेर के पॉलीटेक्निक महाविद्यालय परिसर में हजारों पर्यावरण प्रेमियों, संत समाज के प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने ‘प्रकृति बचाओ महापड़ाव’ के तहत सरकार के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का ऐलान किया। श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, जैसलमेर, फलौदी, बाड़मेर और जोधपुर से यहां लोग पहुंचे थे।
दिनभर चली सभा में वक्ताओं ने ‘सोलर प्लांट’ के नाम पर धार्मिक आस्था के प्रतीक खेजड़ी वृक्ष की कटाई को ‘विकास के नाम पर विनाश’ करार देते हुए सरकार पर जनभावनाओं की अनदेखी का आरोप लगाया।
पर्यावरण संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित महापड़ाव में शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने कहा कि उन्होंने विधानसभा में यह मुद्दा उठाया है लेकिन अब विधानसभा का घेराव करना होगा।
उन्होंने युवाओं से आगे आकर एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार को झुकाने के लिए बड़े आंदोलन जरूरी हैं। भाटी ने ‘अमृता देवी वृक्ष संरक्षण विधेयक-2025’ का उल्लेख करते हुए पेड़ कटाई पर सजा और जुर्माने, दोनों का प्रावधान अनिवार्य बताया।
मुकाम पीठाधीश्वर रामानंद आचार्य ने चेतावनी दी कि जब तक बजट सत्र में खेजड़ी संरक्षण के लिए सख्त कानून नहीं बनाया जाता, महापड़ाव जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने आश्वासन नहीं दिया तो आमरण अनशन शुरू किया जाएगा।
इस दौरान करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महीपाल सिंह मकराना ने आरोप लगाया कि सोलर कंपनियों में सत्ता से जुड़े लोग हिस्सेदार हैं। वहीं भाजपा की प्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष बिहारीलाल बिश्नोई और विधायक प्रतापपुरी ने मुख्यमंत्री की ओर से सख्त कानून बनाने का भरोसा दिलाया।
वक्ताओं ने कहा कि खेजड़ी कल्पवृक्ष है लेकिन सोलर कंपनियों के लिए अब तक 28 लाख पेड़ काटे जा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि डेढ़ साल के आंदोलन के बावजूद न तो कटाई रुकी और न ही दोषियों पर कार्रवाई हुई।
आंदोलन के समर्थन में सोमवार को बीकानेर के बाजार पूरी तरह बंद रहे। निजी विद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया जबकि शिक्षा विभाग ने सरकारी विद्यालयों में आधे दिन की छुट्टी के आदेश जारी किए।