

जोधपुर : राजस्थान में जोधपुर ग्रामीण के खेड़ापा थाना क्षेत्र से दो बहनों के सुसाइड का मामला सामने आया है था, जिसने पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं थे। वहीं अब इस मामले में कार्रवाई हुई है, जिसमें चौकी प्रभारी को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर किया गया है, जबकि थाना अधिकारी और डीवाईएसपी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है।
इस घटना में पुलिस की लापरवाही के चलते एक ही परिवार की दो बेटियों की जिंदगी तबाह हो गई थी। बड़ी बहन की मौत के बाद न्याय के लिए भटक रही छोटी बहन ने आखिरकार सिस्टम से हार मानकर शुक्रवार को पानी की टंकी पर चढ़कर विषाक्त पदार्थ खा लिया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पीड़िता ने 11 अप्रैल को ही आठ नामजद आरोपियों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई थी लेकिन 33 दिनों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उसने लिखित में भी चेतावनी दी थी कि कार्रवाई न होने पर वह जान दे देगी पर पुलिस ने ध्यान नहीं दिया।
इस खौफनाक कहानी की शुरुआत बड़ी बहन से हुई थी। शिकायत के मुताबिक ई-मित्र संचालक महिपाल ने बड़ी बहन को अपने प्रेमजाल में फंसाकर उसके कुछ आपत्तिजनक वीडियो बना लिए थे। इसके बाद महिपाल और उसके साथियों शिवराज, गोपाल, वीजाराम, दिनेश, मनोज और पुखराज ने करीब चार साल तक उसे ब्लैकमेल किया, पैसे ऐंठे और उसका शारीरिक शोषण करते रहे।
इस घिनौनी प्रताड़ना से टूटकर बड़ी बहन ने 20 मार्च को आत्महत्या कर ली थी। बड़ी बहन की मौत के बाद इन दरिंदों ने छोटी बहन को निशाना बनाया। वीडियो वायरल करने की धमकी देकर आरोपी उसे होटलों और खेतों में ले जाकर गैंगरेप करते रहे। आरोपी खुलेआम घूमकर धमकी देते थे कि पुलिस उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती।
इस घटना के बाद राजपूत समाज सहित सर्व समाज का गुस्सा फूट पड़ा। मारवाड़ राजपूत समाज के अध्यक्ष हनुमान सिंह खांगटा के नेतृत्व में लोगों ने मथुरादास माथुर (एमडीएम) अस्पताल की मोर्चरी के बाहर धरना शुरू कर दिया। समाज ने आरोप लगाया कि पुलिस ने आरोपियों को बचाने की कोशिश की। माहौल गरमाता देख प्रशासन को झुकना पड़ा और बाद धरना समाप्त हुआ।