जब श्यामा प्रसाद ने इंडियन म्यूजियम को दिलाई नई पहचान

ट्रस्टी रहते दिलाई थी 'राष्ट्रीय महत्व' की मान्यता : निदेशक
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कोलकाता : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को प्रायः शिक्षा, राष्ट्रवाद और राजनीति में उनके योगदान के लिए याद किया जाता है, लेकिन भारतीय संग्रहालय (इंडियन म्यूजियम) के विकास और उसकी संस्थागत पहचान को मजबूत करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। यह जानकारी सोमवार को 'श्यामा प्रसाद पखवाड़े' के समापन अवसर पर भारतीय संग्रहालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सामने आई।

संग्रहालय के निदेशक सायन भट्टाचार्य ने बताया कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी वर्ष 1931 से लगातार सात वर्षों तक भारतीय संग्रहालय के ट्रस्टी बोर्ड के सदस्य रहे। उन्होंने यह जिम्मेदारी कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बनने से तीन वर्ष पहले संभाली थी। उनके अनुसार, मुखर्जी के कार्यकाल के दौरान ही ब्रिटिश संसद से भारतीय संग्रहालय को 'राष्ट्रीय महत्व' की मान्यता प्राप्त हुई, जो संस्थान के इतिहास की एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

सायन भट्टाचार्य ने भारतीय संग्रहालय और कलकत्ता विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक संबंधों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 1914 में संग्रहालय के शताब्दी समारोह के समय ट्रस्टी बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पिता सर आशुतोष मुखर्जी थे। उसी दौर में दोनों संस्थानों के बीच शैक्षणिक और सांस्कृतिक सहयोग की मजबूत नींव पड़ी, जिसे आगे भी जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।

कार्यक्रम में कलकत्ता विश्वविद्यालय एवं जादवपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. सुरंजन दास, पूर्व विधायक श्रीरूपा मित्र चौधरी तथा विश्वभारती विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने भी भाग लिया। वक्ताओं ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बहुआयामी व्यक्तित्व और शिक्षा, संस्कृति तथा राष्ट्रीय संस्थाओं के विकास में उनके योगदान को याद किया।

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