

सन्मार्ग संवाददाता
नयी दिल्ली / कोलकाता : भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने सोमवार को कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने अभी तक जनगणना कराने की अधिसूचना जारी नहीं की है और इस मुद्दे को राज्य के समक्ष उठाया गया है। पश्चिम बंगाल के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हमारे पास पहले चरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 30 सितंबर तक का समय है। उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल ने जनगणना कराने की अधिसूचना जारी नहीं की है। हमने इस मुद्दे को उनके समक्ष उठाया है।
उम्मीद है कि वे जल्द ही अधिसूचना जारी करेंगे, क्योंकि यह कानूनी रूप से अनिवार्य प्रक्रिया है। हमारे पास पहले चरण की प्रक्रिया के लिए 30 सितंबर तक का समय है।’’ वर्ष 2027 की जनगणना दो चरणों में की जा रही है - पहला चरण आवास सूचीकरण और आवास गणना के रूप में जाना जाता है, और दूसरा चरण लोगों की गणना यानी जनगणना का है। आवास सूचीकरण अभियान प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश द्वारा अधिसूचनाओं के माध्यम से इस वर्ष एक अप्रैल से 30 सितंबर के बीच निर्दिष्ट 30 दिनों की अवधि के दौरान चलाया जाएगा। आवास सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होने से 15 दिन पहले स्व-गणना कराने का विकल्प भी उपलब्ध होगा। नारायण ने कहा कि जनगणना केंद्र शासित प्रदेश का विषय है और संविधान की सातवीं अनुसूची में क्रमांक 69 पर सूचीबद्ध है।
यह जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के तहत आयोजित की जाती है। उन्होंने कहा कि जनगणना राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों के सहयोग से की जाती है। दिल्ली में घर-घर सूचीकरण का चरण दो चरणों में 30-30 दिनों के अंतराल में पूरा किया जाएगा। नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) और दिल्ली छावनी क्षेत्रों में यह प्रक्रिया 16 अप्रैल से 15 मई तक और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) क्षेत्र में 16 मई से 15 जून तक चलेगी। एनडीएमसी और दिल्ली छावनी क्षेत्रों के लिए स्व-गणना एक अप्रैल से और एमसीडी के लिए एक मई से 15 मई तक शुरू होगी। दस राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) ने अप्रैल में इस प्रक्रिया का पहला चरण शुरू करने के लिए अधिसूचना जारी की है, जबकि 15 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इसे मई में शुरू करेंगे। इसी तरह 10 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश जून या उसके बाद पहला चरण शुरू करेंगे।