

केडी पार्थ, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल में अगले पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर अभूतपूर्व प्रशासनिक और राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा राज्य सरकार की भेजी गई पैनल सूची लौटाए जाने के बाद न सिर्फ स्थायी DGP की नियुक्ति अधर में लटक गई है, बल्कि विपक्ष ने इसे राज्य की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बताया है। नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने इस पूरे मामले को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है।
UPSC का पत्र और देरी पर सवाल
कोलकाता में संवाददाता सम्मेलन के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि UPSC ने अपने पत्र में स्पष्ट कहा है कि राज्य सरकार ने DGP नियुक्ति की फाइल भेजने में करीब डेढ़ साल की देरी की। उन्होंने कहा कि UPSC का पत्र इस बात को उजागर करता है कि पश्चिम बंगाल सरकार किस तरह नियमों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी कर रही है।
राजीव कुमार को DGP बनाने की ‘प्लानिंग’ का आरोप
शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की मंशा शुरू से ही राजीव कुमार को स्थायी DGP बनाने की थी। उन्होंने कहा कि इतना बड़ा राज्य होने के बावजूद आज तक बंगाल में स्थायी DGP नहीं है और राजीव कुमार अतिरिक्त प्रभार के तौर पर जिम्मेदारी निभा रहे हैं, जो असामान्य स्थिति है।
वरिष्ठता की अनदेखी का दावा
नेता प्रतिपक्ष ने प्रशासनिक नियुक्तियों में वरिष्ठता की अनदेखी का भी आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि वरिष्ठ अधिकारियों को दरकिनार कर जूनियर अधिकारियों को अहम पद क्यों दिए जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने IAS और IPS एसोसिएशन की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए।
डिपार्टमेंटल प्रोसीडिंग हटाने पर विवाद
शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की सिफारिश के बावजूद कुछ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हटाई गई, जिससे यह संदेश जाता है कि सरकार अपने अधिकारियों को संरक्षण दे रही है।
स्थायी DGP न होने से बढ़ी चिंता
UPSC की आपत्ति के बाद फिलहाल राज्य में कोई स्थायी DGP नहीं है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि कानून-व्यवस्था, चुनावी तैयारियों और संवेदनशील मामलों के लिए स्थायी नेतृत्व बेहद जरूरी है।
आगे क्या?
सूत्रों के अनुसार, अब राज्य सरकार को UPSC के दिशा-निर्देशों और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के मुताबिक नई पैनल सूची तैयार करनी होगी। जब तक UPSC से मंजूरी नहीं मिलती, तब तक स्थायी DGP की नियुक्ति संभव नहीं है। इस बीच, यह मुद्दा राज्य की राजनीति और प्रशासन दोनों में दबाव बढ़ाता नजर आ रहा है।