विधानसभा में धूमधाम से मनाया गया 'पश्चिम बंगाल दिवस'

मंत्रियों ने पाठ्यक्रम में इतिहास को शामिल करने की उठाई मांग
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कोलकाता : लगभग आठ दशकों के बाद विधानसभा में राज्य का स्थापना दिवस मनाया गया। ‘पश्चिम बंगाल दिवस’ के अवसर पर शनिवार को विधानसभा में आयोजित विशेष कार्यक्रम में राज्य के मंत्रियों ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान और पश्चिम बंगाल की स्थापना के इतिहास को स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग उठाई। कार्यक्रम में विपक्षी दलों की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय रही।

उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री तापस राय ने कहा कि 1946 के ‘डायरेक्ट एक्शन डे’, ‘ग्रेट कलकत्ता किलिंग’ और नोआखाली की घटनाओं जैसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रसंगों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने स्कूल शिक्षा मंत्री से इन विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करने का आग्रह किया। तापस राय ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल दिवस का संबंध राज्य के राजनीतिक और भौगोलिक गठन से है, इसलिए इसे पोइला बैसाख से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।

उन्होंने घोषणा की कि 6 जुलाई को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर कोलकाता में उनकी 125 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। संसदीय कार्य मंत्री शंकर घोष ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक दिन है। पश्चिम बंगाल की स्थापना की ऐतिहासिक परिस्थितियों को समझना आवश्यक है।

उन्होंने इतिहास की पुस्तकों में ‘ग्रेट कलकत्ता किलिंग’ और नोआखाली जैसी घटनाओं की उपेक्षा पर भी सवाल उठाए। कार्यक्रम में स्पीकर रथींद्र बोस, स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखोपाध्याय, मुख्य सचेतक अम्लान भादुड़ी सहित कई गणमान्य उपस्थित थे।

विपक्ष की अनुपस्थिति पर तापस राय ने कहा कि सभी को आमंत्रित किया गया था, लेकिन कार्यक्रम में शामिल होना या न होना उनका व्यक्तिगत निर्णय है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस प्रकार की नकारात्मक सोच दुर्भाग्यपूर्ण है।

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