west bengal बंगाल के पारंपरिक खिलौना उद्योग को मिलेगा नया आयाम

आसनसोल में टॉय क्लस्टर की संभावना
मंत्री मलय घटक
मंत्री मलय घटक के साथ भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष नरेश पचीसिया, भारत टॉय एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय बिंजराजका और डॉ. एनजी खेतान
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कोलकाता : भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स और भारत टॉय एसोसिएशन ने 'बंगाल का खिलौना उद्योग : एक बेहतर कल' विषय पर एक विशेष सत्र आयोजित किया। इस सत्र में सरकार और उद्योग जगत के प्रमुख लोगों ने भाग लिया।

मंत्री मलय घटक का उद्योगपतियों को आमंत्रण

पश्चिम बंगाल के श्रम एवं विधि मंत्री मलय घटक ने उद्योगपतियों को आसनसोल में टॉय क्लस्टर स्थापित करने का न्योता दिया। उन्होंने बताया कि वहां भूमि, बिजली, परिवहन और श्रमिकों की पूरी सुविधा है।

बंगाल की पारंपरिक खिलौना विरासत पर चर्चा

सत्र में कृष्णनगर की मिट्टी की गुड़िया, बर्दवान के लकड़ी के खिलौने, बांकुड़ा के घोड़े और शोलापीठ की कलाकृतियों जैसी पारंपरिक शिल्प कलाओं को वैश्विक बाजारों में पहचान दिलाने के उपायों पर चर्चा हुई।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

प्रतिभागियों ने खिलौना उद्योग में कौशल विकास, स्थिरता और एसटीईएम आधारित डिजाइनों को पारंपरिक शिल्प के साथ जोड़ने की जरूरत बताई। भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष नरेश पचीसिया ने बताया कि टॉय निर्यात में बढ़ोतरी दर्ज हुई है — 2023-24 में 152.3 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 172 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया। भारत टॉय एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय बिंजराजका ने कहा कि पहले भारतीय बाजार चीन पर निर्भर था, लेकिन अब देश आत्मनिर्भर बन रहा है और निर्यात की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

तकनीक अपनाने की जरूरत

बिंजराजका ने यह भी कहा कि खिलौना उद्योग अभी भी पारंपरिक विधियों पर निर्भर है और ऑटोमेशन, एआई व 3डी प्रिंटिंग को अपनाने की गति धीमी है। ब्रिजेश रानीलावला ने धन्यवाद ज्ञापन किया

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