

कोलकाता : ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल…’ के जयघोष और भजनों से गुरुवार को गोलाघाटा स्थित डीबीनीटी पैवेलियन (वीआईपी रोड) का सभागार गूंज उठा। यहां श्री दाधीच परिषद, कोलकाता के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ के चौथे दिन श्रद्धालुओं ने धूमधाम से श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया।
कथा व्यासपीठ से राष्ट्रीय संत एवं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास, अयोध्या के महासचिव स्वामी गोविंददेव गिरिजी महाराज ने धर्म, पुण्य, भक्ति और जीवन मूल्यों का संदेश दिया।
स्वामीजी ने कहा कि मनुष्य के जाने के बाद उसकी संपत्ति, गाड़ी, मकान या कारखाना नहीं, बल्कि समाज के लिए किए गए कार्य याद रखे जाते हैं। धन कमाने से जीवन सफल हो सकता है, लेकिन उसे सार्थक बनाने के लिए धर्म और पुण्य अर्जित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा, “पैसा नष्ट हो सकता है, लेकिन पुण्य नहीं। इसलिए मनुष्य की सच्ची कमाई पुण्य ही है।”
कथा में राजा बलि और भगवान विष्णु के वामन अवतार का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि राजा बलि ने अपने संकल्प की रक्षा के लिए स्वयं को भगवान के चरणों में समर्पित कर दिया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें स्वीकार किया। स्वामीजी ने कहा कि सच्ची भक्ति में समर्पण और दृढ़ विश्वास का विशेष महत्व है।
कार्यक्रम की शुरुआत संगीतमय सुंदरकांड पाठ से हुई। इसके बाद भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के प्रसंग के साथ कथा के दूसरे चरण का शुभारंभ हुआ। स्वामी गोविंददेव गिरिजी ने भगवान राम के चरित्र की व्याख्या करते हुए कहा कि उनका जीवन माता-पिता, गुरु, मित्र, भाई, जीवनसाथी और सेवकों के प्रति उचित व्यवहार की प्रेरणा देता है।
रामराज्य का वर्णन करते हुए उन्होंने परस्पर प्रेम, सद्भाव और सह-अस्तित्व के महत्व पर भी प्रकाश डाला। इस दौरान राम-जानकी विवाह का प्रसंग भी सुनाया गया।
गंगासागर धाम भवन निर्माण प्रकल्प के लिए आयोजित इस कथा में स्वामीजी ने श्रद्धालुओं से अपने संबंधों को भगवान से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जीवन में जहां कमी महसूस हो, वहां ठाकुरजी को स्थान देना चाहिए।
उन्होंने अच्छे विचार अपनाने की प्रेरणा देते हुए कहा, “जैसा करोगे विचार, वैसा बनेगा संसार।” उन्होंने गाय सेवा के महत्व पर भी प्रकाश डाला और कहा कि सेवा तथा सद्भाव से जीवन में आध्यात्मिकता का विकास होता है।
कार्यक्रम में हरि नारायण, सीताराम व्यास (हैदराबाद), बृजमोहन बेरीवाल, विधायक विजय ओझा, प्रदीप मुसद्दी, दीपक मुसद्दी, प्रदीप गाड़ोदिया, सीताराम शर्मा (गुरुजी), संजीव शर्मा, प्रदीप सुंतवाल, बंशीधर सुंतवाल, सीताराम तिवाड़ी, निखिल मुसद्दी, शैलेश मुसद्दी और राजेंद्र बाहेती सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
आयोजन को सफल बनाने में अभिलाष तिवाड़ी, पंकज शर्मा, सुभाष शर्मा, रोहित दाधीच, पिंकी शर्मा, श्रीगोपाल व्यास, अनुरोध शर्मा, प्रदीप शर्मा, सुनील दाधीच, संतोष व्यास, रेणु मिश्रा, अनुराग शर्मा, सुरेश ईनाणिया और श्याम सुंदर शर्मा ने सक्रिय भूमिका निभाई।