

कोलकाता : राजनीति के तीखे मतभेदों के बीच भी कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जिन्हें दलगत सीमाएं बांध नहीं पातीं। गुरुवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में पूर्व उपाध्यक्ष, पूर्व मंत्री और शिक्षाविद डॉ. आशीष बंद्योपाध्याय को याद करते हुए कुछ ऐसा ही भावुक माहौल देखने को मिला। शोक प्रस्ताव पर सत्ता और विपक्ष के नेताओं ने उन्हें एक विनम्र, विद्वान और ‘अजातशत्रु’ सहकर्मी के रूप में याद किया।
16 अगस्त को 75 वर्ष की उम्र में निधन हुए आशीष रामपुरहाट से लगातार पांच बार विधायक रहे थे। 2021 में उन्हें विधानसभा का उपाध्यक्ष चुना गया था। हालांकि, सदन में उनकी राजनीतिक उपलब्धियों से अधिक चर्चा उनके सहज और मानवीय व्यक्तित्व की हुई।
राज्य के उद्योग मंत्री तापस राय ने करीब साढ़े चार दशक पुराने संबंधों को याद करते हुए कहा कि बीरभूम की राजनीति में बहुत-सी गलतियां देखने के बावजूद आशीष उनका विरोध नहीं कर पाये। विपक्ष के नेता ऋतब्रत बंद्योपाध्याय ने मृत्यु से दो दिन पहले हुई अंतिम फोन बातचीत का जिक्र करते हुए बताया कि आशीष अपने द्वारा नियुक्त तीन कर्मचारियों की नौकरी स्थायी होने को लेकर चिंतित थे। उनके आखिरी नोट में लिखे शब्द—‘अन्याय देखकर भी चुप रहना पड़ा’—सदन को भावुक कर गये।
वरिष्ठ तृणमूल विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने कथित धमकी का जिक्र किया। परिषद मंत्री शंकर घोष ने कहा कि उनकी मौत राजनीति के सामने कई बड़े सवाल छोड़ गयी है। वहीं, आईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी ने निष्पक्ष जांच की मांग की। अंत में पूरे सदन ने एक मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी—मानो राजनीति कुछ पल के लिए पीछे छूट गयी।